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________________ *******000000000000000606600666066606660666000* 066606❖❖06660606060. ८२ अब कुछ सुनो मजे की बातें, जो है चूरणकी गोली, देकर, मित्रो ! खतम करूं बस, इतनेमें इसकी होली 1 वेष और आचार इन्होंने, शास्त्रविरुद्ध रखाया है, देखो ऐसे अजब मजबने, अपना जन्म गमाया है ॥ ८३ जैनीका तो नाम धरावें, नहीं जैनका लेश रहा, आचारोंको छोड़, वेषको तोड़, दैत्यका रूप धरा । मैले कपड़े रक्खें, मानो तेली राजा आया है, देखो ऐसे अजब मजबने, अपना जन्म गमाया है ॥ ८३ मुखपर पाटा बांधा, लंबा पूंछ बगलमें मारा है, कपड़े की गाती बांधी, यह देखो भील गँवारा है । नहीं वेष मुनियोंका है यह, अपने आप धराया है, देखो ऐसे अजब जब अपना जन्म गमाया है ।। ८५ शास्त्रोंमें नहि यह फरमाया :-' मुखपर पाटा बांधो तुम', साफ साफ तो यही कहा :- ' जब बोलो यतना रक्खो तुम । कहा इसमें धर्म 'वीरने, क्यों इसको न मनाया है ? देखो ऐसे अजब मजबने, अपना जन्म गमाया है || १ महावीरस्वामीने । 1 06.066—666—6.0. ( २० ) Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat C •••••••••—•*•C666CoooCoooooo□••000000000000 www.umaragyanbhandar.com
SR No.034608
Book TitleShiksha Shatak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherAbhaychand Bhagwan Gandhi
Publication Year1915
Total Pages28
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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