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________________ 34.00000000000000000000000000000 * मनमाने ये भेद दिखाकर, मूलतत्त्व उठवाया है, है ऐसे तेरापंथ मजबनें, जगमें ढोंग मचाया है। “नेमनाथने पशुओंकी रक्षा की है भावी दुखसे, " ___ “धर्मरुचीने जीव बचाये, भाविकालमें मरनेसे । " () “मेघकुमरने ससलेको भी इसी प्रकार रखाया है, " ऐसे तेरापंथ मजबने, जगमें ढोंग मचाया है। वे अनुकंपा जिन आज्ञामें, इनको आज्ञा रहित गिने:___"हरिकेशी पर भक्ति जगाकर, यक्ष, शरीर प्रवेश करे।" () "धारिणिने अनुकंपा लाकर इच्छित भोजन खाया है, " ऐसे तेरापंथ मजबने, जगमें ढोंग मचाया है । ॐ * " हरिणिगमेषी देव, दयासे षट् पुत्रोंको लाया है, " " अनुकंपासे ही जिनवरने, मखलिपुत्र बचाया है।" “हरिका ईंट उठाना, " " सुरने जलधरको बरसाया है " ऐसे तेरापंथ मजबने, जगमें ढोंग मचाया है ।। ४२ क्या अनुकंपा हो सकती है, प्रभु आज्ञासे रहित कभी ? दुःखनाशकी इच्छा तो रखते हैं, मानवमात्र सभी । फिर भी इसको नहीं मानते, यही इन्होंकी माया है, ऐसे तेरापंथ मजबने, जगमें ढोंग मचाया है। १ गोशाला. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034608
Book TitleShiksha Shatak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherAbhaychand Bhagwan Gandhi
Publication Year1915
Total Pages28
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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