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________________ (८०) पत्रीमार्गप्रदीपिका। उदाहरण। जैसे विंशोत्तरी सूर्य महादशामें सूर्यकी अंतर्दशा मास ३ दिन १८ की है इसमें विदशा करना है इसलिये इसके दिन किये १०८ हुए इनको विंशोत्तरी दशाके सूर्यके वर्ष ६ से गुणन किये ६४८ हुए इनमें विंशोत्तरी दशाके मानके वर्ष १२० एकसौ बीसका भाग दिया लब्ध५ दिन आये शेष ४८ बचे इनको ६० साठगुणे किये २८८० हुष इनमें १२० एकसौ बीसका भाग दिया लब्ध २४ वटी आयी शेष बची ६० साठ गुणा करके १२० का भाग देने से १ पल आयी यह सूर्यको अन्तर्दशामें ५ दिन २४ घटीकी सूर्यको विदशा हुई । ऐसे ही सूर्यकी अंतर्दशाके दिन १०८ को चंद्रादिकके वासे क्रमसे गुणन करके १२० दशामानका भाग देने से दिनादिक सूर्यकी अन्तर्दशामें विदशा हुई । इसी प्रकार विंशोत्तरी दशाकी शेष चंद्रादि ग्रहोंकी अंतर्दशामें तथा अष्टोत्तरी योगिनीकी अंदर्दशामें विदशा दिनादिक जानना ॥ सर्यमध्येसूर्यातरतन्मध्येविदशा सूर्यमध्येचंद्रातरतन्मध्येविदशा. # |om 12.० •०० ००० ००० .४० ००००० 1010101060.001010101010101010/प. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034576
Book TitlePatrimarg Pradipika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMahadev Sharma, Shreenivas Sharma
PublisherKshemraj Krishnadas
Publication Year1851
Total Pages162
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size27 MB
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