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________________ भाषाटीकासहिता। (५१) ९।६।५।११, चंद्रसे ११।६।३।१०, बुधसे ५।३।९।१२।६।११।१०,लमसे ३॥ १०।४।११।६।१२ स्थानमेशुभफल देता है। इन शुभफलपदस्थानों में रेखा दे और शेष स्थानों में बिंदु (शून्य) देनेपर सूर्यका अष्टवर्ग होता है ॥२२॥ अयरवेरष्टवर्गाकाः ४८. ||में | बु गु शु श ल. GeOA my -14 2006 LEnews अथ चंद्रस्याष्टवर्गः। भौमाद्ग्लौनवधीधनोपचयगः षट्च्याप्तिधीस्थोऽर्कजालग्नाच्चोपचये रखेरुपचयाष्टास्तेषु शस्तो बुधात् । धीरंधेशचतुष्टयं त्रिषु गुरोः केंद्राष्टलाभव्यये स्वादेकोपचयास्तगत्रिखभवास्तांबुत्रिकोणे भृगो ॥२३॥ चंद्राष्टवर्ग कहते हैं:--चंद्रमा भौमसे ९।५।२।३।६।१०।११, शनिसे ६।३।११।५, लग्नस ३।६।१०।११,सूर्यसे ३।६।१०।११८ ७, बुधसे ५।८।११।१।४।७।१०।३, गुरुसे १।४ । ७ । १० 101 ११ । १२, चंद्रसे १।३।६।१०।११।७, भृगुसे ३ । १०।११।७।४। ९.५ में स्थानमें शुभफल देता है। इन स्थानोंमें रेखा दे और शेष स्थानोंमें शून्य देनेसे चंद्रका अष्टवर्ग होता है ॥ २३ ॥ अथ भौमस्याष्टवर्गमाह । स्वाद्भौमोऽष्टचतुष्टयायधनगो जीवात्पडायांत्यखे चन्द्रादायरिपुत्रिगो भृगुसुतादष्टांत्यलाभारिगः । ज्ञापंचायरिपुत्रिगोऽर्कतनयात्केंद्राष्टधर्मायगः सूर्याचोपचयात्मजेषु तनुतस्त्र्यायारिखाये शुभः ॥ २४ ॥ अब भौमका अष्टवर्ग कहते हैं:-भौम अपने स्थानसे ८।१।४। ७१०१११२, गुरुसे ६ । १३ । १२ । १०, चंद्रसे ११।६।३, शुक्रसे ८ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034576
Book TitlePatrimarg Pradipika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMahadev Sharma, Shreenivas Sharma
PublisherKshemraj Krishnadas
Publication Year1851
Total Pages162
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size27 MB
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