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________________ भाषारीकासहिता। (११) कोष्ठक ५४।१२।३६को अंवर ०८।३६ का भाग दिया परंतु भाज्य ८।१५ भाजक ८३६ हैं इसलिये इनको सवर्णित करके भाग दिया भाज्य पिंड४९५ भाजकपिंड ५१६ हुए भाज्यपिंड ४९५ में भाजकपिंड ५१६ का भाग दिया लब्ध अंश आया शेष ४९५ को ६० साठगुणा किये २९७० ० हुए इनमें भाजक ५१६ का भाग दिया लब्ध५७कला आयी शेष२८८ बचे इनको ६० साठ गुणे किये १७२८० हुए इनमें भाजक ५९६ का भाग दिया लब्ध ३५ विकला आयी ऐसे अंशादिक फल तीन ०।५७।३५ आये इनको १०।१५०० में युक्त किये १०।१५।५७।३५ हुए इसमेंसे अयनांश २२।२९।० हीन किये शेष९।२३।२८।३५ बचे यह स्पष्टलन हुआ इसमेसे६छ राशि मिलानेसे ३।२३। २८॥३५ सप्तमभाव हुआ इसीप्रकार १० दशम भावका साधन किया. उसका उदाहरण भी नीचे लिखा है-प्रथम दशमभावके इष्टका उदाहरण-सूर्योदयसे घटयादिक इष्ट ५६।४८१८ दिनार्ध १४॥२५॥० दिनार्धको सूर्योदयसे इष्टमेंसे हीन किया शेष ४२।२३।१८ बचे, यह दशमका इष्ट आया-तदनंतर सायनसूर्य १३॥९॥२२॥३९ की राशि ११ अंश ९ के समान दशमपत्रका कोष्ठक ५६।४५।२४ में दशमका इष्ट ४२।२३।१८ युक्त किया ३९।८।४२ हुए इसकी विपरके अंक ४२ में सूर्यकी कला २२ विकला ३९ को सूर्यको राशि ११ के ध्रुव ९।१६ से गुणन करके आये हुए २०९ अंकको युक्त किये ३९।८।२५१ विपलमें ६० का भाग दिया लब्ध ४ को पलके अंक ८ में मिलाये ३९।१२।११ यह इष्टयुक्त कोष्ठक हुआ इससे अल्पकोष्ठक ३९७१६ राशि ७ अंश २७ के कोष्ठकमें मिलते हैं इसलिये७राशि २७ अंश लिये, नीचे कला विकला० शून्य लिखी ७।२७०० हुए-तदनंतर अल्पकोष्ठक ३९। ७।६ और इष्ट कोष्ठक ३९।१२।११ का अंतर किया ०।५।५ शेष बचे इनसे अल्पकोष्ठक ३९४६ और इसके आगेका (ऐष्य ) कोष्ठक ३९।१७।४ के अंतर ९।५८ का भाग दिया परंतु भाज्य भाजक दोनो पलादिक अंकके हैं इसलिये भाज्य भाजकको सवर्णित करके भाज्यपिंड ३०५ में भाजक ५९८ का भाग दिया लब्ध० अंश आया शेष ३०५ को ६० साठ गुणा किया १८३०० हुए इनमें भाजकर्पिड ५९८ का भाग दिया लब्ध ३० कला आयी Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034576
Book TitlePatrimarg Pradipika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMahadev Sharma, Shreenivas Sharma
PublisherKshemraj Krishnadas
Publication Year1851
Total Pages162
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size27 MB
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