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________________ (१०) पत्रीमार्गप्रदीपिका। परं ४ चतुझं हस्तनक्षत्रे व. २९ । ९ परं चित्रानक्षत्रे गण्डयोगे, व.४४।५ बालवकरणे एवं पञ्चाङ्गशुद्धावत्र दिवसे श्रीमन्मार्कण्डमण्डलाोदयादिष्टघटी ५६ पल ४८ विपल १८ स्पष्टार्क १० ॥ १६॥५३॥३९ लग्न ९।२३ समये ज्यो. श्रीनिवासशर्मणो जन्मसमयः । दिनमानम् २८१५० अयनांशाः २२।२९।० 10 अथ जन्माङ्गम्. रतलाममें तथा रतलामके समीपके ग्रामोंमें सौर कम्प क्षके स्पष्टग्रह ग्रहवेधसे दृक्तुल्य मिलते हैं इसवास्ते सौर पक्षके स्पष्टग्रह ग्रहलाघवाख्य करणग्रंथसे किये ग्रंथगताब्दाः ३५१ चक्र ३१ अधिकमास ६ मासगण १३६ ऊनाह ६४ अहर्गण ४०३९. मच सटाःसटाः .. ... .. : 5:00 " ... . . . . . | . . | रा. के. २२३ " ३८| |४|४६ ३९ १५४ १८ Mms/RAT | |२३ ३॥ ३॥ 2 ..|३| लगसाधनका उदाहरण । स्पष्टसूर्य १०।१६।५३।३९ में अयनांश २२।२९।० युक्त किया ११ । ९।२२।३९ यह सायनसूर्य हुआ,इसकी राशि ११ अंश ९ के समानलमपत्रका कोष्ठक ५७१२१६ में जन्मसमयका घटयादिक इष्ट ५६१४८।१८ युक्त किया ५४।९।२४ हुए इसकी विपलके २४ अंकमें सूर्यकी कला विकला २२॥३९ को सायनसूर्यकी ११ राशिके ध्रुव ७३४ से गुणन करके आये हुए १७१ अंक युक्त किये ५४।९।१९५ हुए विपल ६०साठसे अधिक हैं इसलिये साठका भाग दिया लब्ध ३ आये ये ऊपरकी पलके अंक ९ में युक्त किये ५४ । १२॥ १५॥ यह इष्टकोष्ठक हुआ ॥ इससे अल्पकोष्ठक लमपत्रमें ५४।४।० दश(१०) राशि १५ अंशके कोष्ठकमें मिलता है इसवास्ते १० राशि १५ अंश लिये इसके नीचे कलाविकला •० शून्य शून्य लिखनेसे १०१५ ०० हुए तदनंतर अल्पकोष्ठक ५४।४। और इष्टयुक्त कोष्ठक ५४।१२।१५ के अंदर किया ०८।१५शेष बचे इसमें अल्पकोष्ठक ५४।४।० और इसके आगेका (ऐष्य) Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034576
Book TitlePatrimarg Pradipika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMahadev Sharma, Shreenivas Sharma
PublisherKshemraj Krishnadas
Publication Year1851
Total Pages162
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size27 MB
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