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________________ सत्य-अणुव्रत ७७ १५ - असत्य विज्ञापन न करना । लोग कहते हैं विज्ञापनकी दुनिया है जो जितना अधिक विज्ञापन कर सकता है वही अपने व्यवसाय व कार्य में उतना ही अधिक सफल होता है । किन्तु अब तो इन विज्ञापनोंकी भरमारमें असत्य की दुनियां होने लगी है । वास्तविकता कम और प्रचार अधिक आजके मनुष्यका सिद्धान्त सा बनता जा रहा है। बड़े-बड़े व्यवसायी लाखों और करोड़ों रुपये मात्र विज्ञापन में व्यय करते हैं । जो पदार्थ मानव जातिके लिये अहितकर है उसका भी व्यवसाय बढ़ाने में उन्हें तनिक भी संकोच नहीं होता । अणुव्रतीका विज्ञापन वास्तविकता - शुन्य नहीं होना चाहिये । वास्तविकताका दिग्दर्शन सुन्दर शब्दोंसे व सुन्दर प्रकार से हो वह दूसरी बात है । अतिशयोक्तिपूर्ण और असत्यप्रायः विज्ञापन अणुव्रती के लिये सर्वथा वर्जित है । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034471
Book TitleAnuvrat Drushti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNagraj Muni
PublisherAnuvrati Samiti
Publication Year1954
Total Pages142
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
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