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________________ १३४ समय एवं २९ बोल अधोलोक में पावे इसी तरह तीर्यंं लोक भे २९ और ऊर्ध्व लोक में काल का समय छोड़ के शेष २८ बोल पावे | सर्व लोक में बोल पावे २९ पूर्ववत् और अलोक में नीवादि नही है फक्त आकाश है वह भी सर्वाकांश से अनन्त में भाग न्यून ( लोक जितना न्यून ) | atarata के एक आकाश प्रदेश पर जीव नहीं है जीव का देश, प्रदेश और अजीव, अजीव के देश, प्रदेश है । यथा(१) घेणे एकेन्द्रिय के घणे देश तो नियमा है। ( २ ) घणे एकेन्द्रिय के घणे देश एक बेरिन्द्रिय का एक देश । ( ३ ) घणे बेन्द्रिय के घणे देश । एवं तेन्द्रिय, चौरिन्द्रिय, पंचेन्द्रिय और अनेन्द्रिय के दो दो बोल कहना एवं ११ । 11 99 > ( ३ ) 33 ( १ ) घणे एकेन्द्रिय के घणे प्रदेश । ( २ ) घणे एकेन्द्रियके घणे प्रदेश और एक बेन्द्रियका घ प्रदेश | ( ३ ) " एवं तेन्द्रिय २ चौन्द्रिय २ पचेन्द्रिय २ एवं ९ और घणे "" ( १ ) घणे एकेन्द्रियके घणे देश और एक अनेन्द्रियको एक देश । "3 " י "> "1 "" "" " " " घणे " "" " :) एवं ३-९-११ मिलके २३ भांगे हुवे और अजीब के ४ भेद चार रुपी और पांच अरुपी पूर्ववत् कुल ३२ बोल हुये। ऊंचा लोक के एक आकाश प्रदेश पर काल का सम " $9 52 " घणे देश.
SR No.034232
Book TitleShighra Bodh Part 06 To 10
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherVeer Mandal
Publication Year1925
Total Pages314
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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