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________________ संयमाधिकार. ( २७५ ) (३१) समुद्घात - सामा० छेदो० में केवली समु० वर्जके छे समु० पावे. परिहार० तीन क्रमसर सूक्ष्म० समु० नहीं. एक केवली समुद्घात । यथा० ( ३२ ) क्षेत्र० च्यार संयम लोकके असंख्यातमे भागमें होवे । यथा० लोकके असंख्यात भागमें होवे तथा सर्व लोक में ( केवली समु० अपेक्षा ) ( ३३ ) स्पर्शना - जेसे क्षेत्र है वेसे स्पर्शना भी होती है परन्तु यथाख्यातापेक्षा कुच्छ स्पर्शना अधिक भी होती है । ( ३४ ) भाव -- प्रथमके व्यार संयम क्षयोपशम भावमें होते है और यथाख्यात, उपशम तथा क्षायिक भावमें होता है। ( ३५ ) परिणाम द्वार - सामा० वर्तमानापेक्षा स्यात् मीले स्यात् न मीले अगर मीले तो ज० १-२-३ उ० प्रत्येक हजार मीले । पूर्व पर्यायापेक्षा नियम प्रत्येक हजार क्रोड मीले । एवं छेदो० वर्तमानापेक्षा मीले तो १-२-३ प्रत्येक सौ मीले । पूर्व पर्यायापेक्षा अगर मीले तो ज० उ० प्रत्येक सौ क्रोड मीले। परिहार० वर्तमान अगर मीले तो १-२-३ प्रत्येक सौ पूर्व पर्याय मी तो १-२-३ प्रत्येक हजार मीले। सूक्ष्म० वर्तमानापेक्षा मीले तो १-२-३ उ० १६२ मीले जिस्में १०८ क्षपकश्रेणि और ५४ उपशमश्रेणि चढते हुवे पूर्व पर्यायापेक्षा मीले तो १-२-३ उ० प्रत्येक सौ मीले । यथा वर्तमान अगर मीले तो १-२-३ उ० १६२ । पूर्व पर्यायापेक्षा नियमा प्रत्येक सौ क्रोड मीले (केवली की अपेक्षा) ( ३६ ) अल्पाबहुत्व | (१) स्तोक सूक्ष्म संपराय संयमवाले । ( २ ) परिहार विशुद्ध संयमवाले संख्याते गुने |
SR No.034231
Book TitleShighra Bodh Part 01 To 05
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherSukhsagar Gyan Pracharak Sabha
Publication Year1924
Total Pages430
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size11 MB
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