SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 238
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ( १९२ ) शीघ्रबोध भाग ३ जो. द्रव्यके उत्तर सामान्य स्वभाव । (१) अस्तिस्वभाव- द्रव्य-द्रव्यका गुणपर्याय. क्षेत्र जिस : क्षेत्रमें द्रव्य रहा हुवा है-काल द्रव्यमें उत्पात व्यय ध्रुव-२ -भाव एक समय कारणकार्य स्वभाव । जेसे घट घट अस्तित्व' और पटमे पटका अस्तित्वं । ( २ ) नास्तिस्वभाव - एक द्रव्यकि अपेक्षा दुसरे द्रव्य में बह द्रव्य क्षेत्र काल भाव नहि है जेसे घटमें पटक नास्ति पटमें afa नास्ति । (३) नित्यस्वभाव - द्रव्यमें स्वगुणो प्रणमनेका स्वभाव free है. (४) अनित्यस्वभाव - द्रव्य में परगुण प्रणमनेका स्वभाव. अनित्य है । (५) एक स्वभाव - द्रव्यमें द्रव्यत्व गुण एक है. (६) अनेकस्वभाव - द्रव्यमें गुण पर्याय स्वभाव अनेक है (७) भेदस्वभाव--- आत्म परगुणापेक्षा भेद स्वभाववाला है जैसे चैतन्य कर्मसंग परवस्तुकों अभेद मान रखी है तथापि चैतन्य जडत्वमें भेद स्वभाववाले हं मोक्षगमन समय निजगुणोंसे जड भेद स्वभाववाले ह. (७) अभेदस्वभाव-- आत्माके ज्ञानादि गुण अभेद स्वभाववाले है. ( ९ ) भव्यस्वभाव - - आत्माके अन्दर समय समय गुणप afe कारण कार्यपणे प्रणमते रहेना इनकों भव्व स्वभाव कहते है । (१०) अभव्वस्वभाव - आत्माका मुल गुण कीसी हालतमे नही बदलता है याने हरेक द्रव्व अपना मुल गुणकों नही पलटाते है
SR No.034231
Book TitleShighra Bodh Part 01 To 05
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherSukhsagar Gyan Pracharak Sabha
Publication Year1924
Total Pages430
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size11 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy