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श्रमण सूक्त
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गुम्विणीए उवन्नत्थं
विविह पाणभोयण। भुज्जमाणं विवज्जेज्जा भुत्तसेस पडिच्छए।।
(दस. ५ (१) : ३६)
AHARA
गर्भवती स्त्री के लिए बना हुआ विविध प्रकार का भक्तपान वह खा रही हो तो मुनि उसका विवर्जन करे, खाने के बाद बचा हो वह ले ले।
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