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________________ श्रमण सूक्त - तया मुडे भवित्ताण पव्वइए अणगारिया (द ४ १८ ग, घ) जब मनुष्य सर्व सयोगो को त्याग देता है तब वह मुंड होकर अनगार वृत्ति को स्वीकार करता है। - तया सवरमुक्किट्ठ धम्म फासे अणुत्तरं। (द १६ ग, घ) जब मनुष्य अनगार-वृत्ति को स्वीकार कर लेता है तब वह उत्कृष्ट सवरात्मक अनुत्तर धर्म का स्पर्श करता है। २७ तया लोगमलोग च जिणो जाणइ केवली। (द ४ २२ ग, घ) जब मनुष्य केवल ज्ञान और केवल दर्शन को प्राप्त कर लेता है तब वह जिन और केवली होकर लोक तथा अलोक को जान लेता है। - EIN ३७८
SR No.034105
Book TitleShraman Sukt
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShreechand Rampuriya
PublisherJain Vishva Bharati Samsthan
Publication Year2000
Total Pages490
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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