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सामने नहीं आ सकी । आज उनका स्मरण कर मन बहुत भावुक हो उठता है।
सतत अहिंसक चिन्तन करने वाले तथा अहिंसक जीवन को चरितार्थ करने वाले सभी महाव्रती आचार्यों, मुनियों तथा अहिंसा के अन्य साधकों के प्रति मैं विनयी हूँ, जिनके आशीर्वाद से मुझे यह दृष्टि प्राप्त हुई है।
मैं आभारी हूँ आदरणीय कुलपति प्रो. उषारानी कपूर तथा शोध एवं प्रकाशन अधिकारी आदरणीय प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय जी का जिन्होंने अपने आशीर्वाद के साथ ग्रन्थ प्रकाशन की स्वीकृति प्रदान की तथा तत्परता से इस ग्रन्थ का सुन्दर प्रकाशन किया है। डॉ. ज्ञानधरपाठक जी की सक्रियता के बिना यह कार्य जल्दी संभव नहीं था, अत: उनका विशेष धन्यवाद।
मेरे विभाग, संकाय तथा विद्यापीठ के सभी विद्वानों के प्रति भी मैं आभार व्यक्त करता हूँ। इस प्रस्तुति में सुधी पाठक कुछ नया जोड़ सकें तो मैं अपना सौभाग्य मानूँगा।
तीर्थंकर ऋषभदेव जयन्ती 16 मार्च 2012
डॉ. अनेकान्त कुमार जैन
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