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________________ जीवों का सहारा लेकर समझाते हैं । जैसे कोई दौड़ में भाग लेने वाले धावक एक साथ दौड़ना प्रारम्भ करते हैं । उनमें से कोई तो आगे निकल जाते हैं, कोई बीच में रह जाते हैं और कोई पीछे रह जाते हैं । कल्पना करो कि पाँच मिनट बाद फिर धावकों की एक टुकड़ी उसी स्थान से दौड़ लगाती है। उनमें से कुछ धावक पहले दौड़ने वाले किन्हीं धावकों को पा लेते हैं। जो पाँच मिनट पहले दौड़े थे, उनमें जो सबसे आगे थे उन्हें तो नहीं मिला पाते हैं किन्तु उनमें जो बीच में दौड़ रहे थे या पीछे रह गए थे उनको मिला लेते हैं। जो पाँच मिनट पहले एक साथ दौड़े थे लेकिन पीछे रह गए। उनकी विशुद्धि कम थी और जिन धावकों ने बाद में चलना प्रारम्भ किया किन्तु आगे वालों को मिला लिया उनकी विशुद्धि अधिक थी । इसी तरह अध:प्रवत्तकरण में कुछ परिणाम ऐसे होते हैं जिनकी विशुद्धि अपेक्षाकृत कम होती है और एक, दो सेकण्ड या मिनट बाद कोई अधःप्रवृत्तकरण प्रारम्भ करता है तो पहले वाले से उसके परिणाम मिल जाते हैं पिछले वाले जीव से इसी समानता के कारण इन्हें अधःप्रवृत्त अर्थात् नीचे प्रवृत्ति करने वाले कहे जाते हैं । नाना जीवों से तुलना करने का तात्पर्य उन परिणामों की क्वालिटी बताने का है जो परिणाम अन्तर्मुहूर्त तक एक समान नहीं रहते हैं । अपूर्वकरण- इस करण में भिन्न समय में रहने वाले जीव के परिणाम समान, असमान दोनो होते हैं। इसका नाम अपूर्वकरण इसलिए है कि यहाँ आगे-आगे के समयों में स्थित जीवों के द्वारा जो पूर्व-पूर्व समयों में नहीं प्राप्त हुए हैं ऐसे विशुद्ध परिणाम प्राप्त किए जाते हैं । पूर्वोक्त उदाहरण में जो पाँच मिनट बाद दूसरी टुकड़ी ने रेस लगाई। मान लो कि उस टुकड़ी के धावक कितना ही तेज दौड़ें फिर भी परिणामों की विशेषता है कि भिन्न- समयवर्ती जीव के परिणामों में भिन्नता ही रहेगी। इसके विपरीत अधःप्रवृत्तकरण में भिन्न-भिन्न समयवर्ती जीवों के परिणामों में समानता पायी जाती है। तथा क समयवर्ती जीवों में जैसे अधःप्रवृत्तकरण में समानता और असमानता दोनों होती है वैसे ही अपूर्वकरण में भी है। अनिवृत्तिकरण- यहाँ एक समयवर्ती जीवों के परिणामों में समानता पाई जाती है तथा उपरमि समयवर्ती जीवों की विशुद्धि अनन्त गुणी बढ़ी हुई रहती है। जैसे पूर्वोक्त उदाहरण में एक टुकड़ी एक साथ दौड़ लगाने को तत्पर हुई तो वे सभी जीव एक साथ अनिवृत्तिकरण प्राप्त करेंगे उनके प्रति समय के परिणाम समान होंगे। जो धावक एक समय पीछे दौड़ना प्रारम्भ किए तो वे आगे वाले के समान नहीं हो पाएंगे, इसी तरह जो एक समय बाद अनिवृत्तिकरण को प्राप्त किए हैं, उनके परिणाम अनन्तगुणे हीन विशुद्धि वाले होंगे और आगे वाले के अनन्तगुण अधिक विशुद्धि वाले होंगे। इससे स्पष्ट है कि भिन्न समयवर्ती जीवों के परिणामों में असमानता ही होती है और समान समयवर्ती जीवों के परिणामों में
SR No.034024
Book TitleTitthayara Bhavna
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPranamyasagar
PublisherUnknown
Publication Year
Total Pages207
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size1 MB
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