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________________ 145 शिक्षाप्रद कहानिया हूँ और मेरा निवेदन यह है कि- इस संसार में सबसे शीतल चन्दन होता है, क्योंकि उसको घिसकर शरीर पर लगाने से महान् शीतलता का अनुभव होता है। वर्तमान में अगर लोगों से पूछा जाए तो लोग जवाब देगें किकोकाकोला सबसे शीतल होती है क्योंकि अंग्रेजी में उसका नाम ही कोल्डड्रिंक है, कोई कहेगा की आईसक्रीम सबसे शीतल होती है, कोई कहेगा अमुक कम्पनी का एयरकंडीशनर, कूलर, फ्रिज, कपड़े, गाड़ी आदि ये सभी शीतलता देते है। अतः ये सब शीतल होते हैं। संयोगवश उस राज्यसभा में एक साधु भी बैठे हुए थे वे बिल्कुल मौन-चिंतन मुद्रा में बैठे हुए बड़े ही मनोयोग से उन सभी की बातें सुन रहे थे। अंत में जब उन सबकी बातें खत्म हो गयी तो उन्होंने भी निवेदन किया कि- मैं भी कुछ कहना चाहता हूँ, और मेरा मानना यह है कि- यहाँ उपस्थित इन लोगों ने शीतलता से संबंधित जिन-जिन वस्तुओं के नाम लिए हैं वे वस्तुएं क्वचित्, कदाचित, कथंचित् शीतल हो सकती हैं शरीर के लिए, आत्मा के लिए नहीं और शरीर को मिली हुई शीतलता वास्तव में शीतलता नहीं होती है। उससे शरीर को कुछ देर की शीतलता मिल जाती है आत्मा को नहीं। आत्मा को अगर कोई वस्तु शीतलता प्रदान कर सकती है तो वह वस्तु है- सम्यक्ज्ञान और सम्यक्ज्ञान है- आत्मज्ञान और जिस दिन यह हो जाता है वही होती है असली शीतलता। कहा भी गया है न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।
SR No.034003
Book TitleShikshaprad Kahaniya
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKuldeepkumar
PublisherAmar Granth Publications
Publication Year2017
Total Pages224
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size477 KB
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