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________________ हमाल (कुली) मतो इसजंगल में अरे ठहर । ठहर। अब हम क्याकरें? तीन हिस्सा करके, गठरी फेंक कर नहीं रुकंगा। . भाग गया दष्टगठरी तो भारी है। ले चलें भागा। AKAL P आधी रात का समय था। बनारसीदास, नरोत्तमव उनके श्वसुर रोते-कलपते जंगल मे आगे बढ़े जा रहे थे। जंगल में डाकुओं का अड्डा । कौन है वहां? अरे बापरे डाकू!) प्राण AD | डाक सरदारको अपनी ओर आते ई सावास्यमिदं सर्वमयत्किंजगत्याम पावलगत . देखकर बनारसीदास को एकयक्ति सझी। जगत......बाह्मणका आशीर्वाद है। पाण्डताअपिता) हमारे गुरु है। श...डरनामत। (मेरी कुटिया आपलोगजंगल में हमरास्ता मलकोई बातनहीं रात्रि विश्राम करलीजिए। पावत्र काजोलनी रात.को...... ग 'राजमान | NIA कल हम आपको रास्ता बता देगे। चन्यवाद श्री मान
SR No.033210
Book TitleKavivar Banarasidas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAkhil Bansal
PublisherBahubali Prakashan
Publication Year1987
Total Pages27
LanguageHindi
ClassificationBook_Comics, Moral Stories, & Children Comics
File Size30 MB
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