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________________ सन्-1605ई. बनारसीदास बादशाह अकबर अरेहमारे आका सम्राट अकबरका) बनारससे जौनपुर लौट आए का इन्तकाल होगया मरगएरेदेहांत होगया | थे तभी....T LE बनारसीदास थरथर कांपने लगे। अकबरके देहांतकीखबर | (इनका रक्त बहनारोको। सुनकर बनारसीदास सीढ़ियों सेलुढ़क पड़े। (हे भगवान) अकबरकी मृत्युसेसारा नगर आतंकित होठा था। हि भगवान या अल्लाह SA 110. आ.आहा सोना-चांदी सब छिपालो। आगरा से यह खबर अनिकेबाद ..नूरुद्दीनजहांगीरने पदवी धारण की है, अराजकता फैलनेवाली है कि राजधानी में शांति है और... लोगों में व्याप्त आतंक खत्म हआ। सेठजी, अब गोमती पारकर भागने की जरूरत नहीं। संकट टल गया। TAB A मैं अब शिवरूपी शंखकी) जानहीं करूंगा। बनारसीदास मै शिव का अनन्य । सोच रहे थे। भक्त और उपासक था। (किन्तु मैं सीढीसे गिर (कर चायल हुआ तो (उन्होंने रक्षानहीं की।) Ja RROMAN
SR No.033210
Book TitleKavivar Banarasidas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAkhil Bansal
PublisherBahubali Prakashan
Publication Year1987
Total Pages27
LanguageHindi
ClassificationBook_Comics, Moral Stories, & Children Comics
File Size30 MB
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