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प्रोसवात जाति का इतिहास
इसके बाद एक पंक्ति गद्य में लिखी हुई है कि जिसमें उक्त मन्दिर की प्रतिष्ठा का समय १०५३ को माघ सुदी १३ पुष्य नक्षत्र का बताया गया है। इसी दिन इस मन्दिर के शिखर के ऊपर ध्वजारोपण भी किया गया था।
इसके बाद दूसरा लेख शुरू होता है। इस लेख में कुल २१ पद्य हैं। यह लेख भी बहुत कुछ ऊपर के लेख से मिलता जुलता है। इस लेख के पहले श्लोक में जैन धर्म की प्रशंसा की गई है । दूसरे श्लोक में हरिवर्म राजा का, तीसरे में विदग्ध राजा का और चौथे में मम्मट राजा का वर्णन है। इसमें यह भी लिखा गया है कि बलभद्र आचार्य के उपदेश से विदग्ध राज ने हस्तीकुण्डी में एक मनोहर जैन मन्दिर बनवाया और उक्त मन्दिर के खर्च के लिये आवक जावक माल पर कुछ कर लगाये जाने का भी उल्लेख है। राजा का यह आदेश संवत् ९७३ के आषाढ़ मास का है। इसके बाद संवत् ९९६ की माघ बदी को मम्मट राज ने फिर उसका समर्थन किया था। इस लेख के आखिरी में यह प्रार्थना की गई है कि जब तक पृथ्वी पर पर्वत, सूर्य, भारतवर्ष, गंगा, सरस्वती, नक्षत्र, पाताल और सागर विद्यमान रहें तब तक यह शासन पत्र केशवसूरि की संतति में चलता रहे । बामनवाड़ी का जैन मान्दिर
सिरोही राज्य में पिंडवाड़े के स्टेशन से करीब चार माइल उत्तर पश्चिम में बामनवाड़जी का प्रसिद्ध और विशाल महावीर स्वामी का जैन मन्दिर है जहाँ पर दूर २ के लोग यात्रा के लिये आते हैं । यह मन्दिर कब बना, इसका पता नहीं लगता । परन्तु इसके चौतरफ के छोटे २ मन्दिरों में से एक पर संवत् १५१९ का लेख है। इस से यह मालूम होता है कि मुख्य मन्दिर उक्त संवत् से पूर्व का होना चाहिये । इस मन्दिर के पास एक शिवालय भी है, जिसमें परमार राजा धारावर्ष के समय का वि० सं० १२४९ का लेख है। यहाँ पर फाल्गुन सुदी ७ से १४ तक मेला होता है। पिंडवाड़ा का जैन मन्दिर
पिंडवाड़ा यह एक पुराना कसबा है। यहां पर एक प्राचीन महावीर स्वामी का जैन मन्दिर है। इसकी दीवाल में वि० सं० १४६५ का एक शिलालेख लगा हुआ है। उक्त लेख में इस गाँव का नाम पिंडरवाटक लिखा है। बसंतगढ़ का जैन मन्दिर
सिरोही राज्य में अजारी से करीब तीन माइल दक्षिण में बसंतगड़ है। इसको बसंतपुर भी