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________________ EMAINE SHIRRORAKASRY सस Aspoon 30 ANMO SileneHADRAMANISHADIMA N ANDIN मद्रास, वि.सं. २०५१ १३-८-२०००, रविवार सावन शुक्ला द्वितीय-१३ सामूहिक प्रवचन स्थान : वागड़ सात चौबीसी, विषय : गुरु भक्ति पूज्य मुनिश्री धुरन्धरविजयजी महाराज : * तीन रविवार से पालीताना बिराजमान पूज्यश्री पधारते हैं । संघ भी उल्लासपूर्वक एकत्रित होता है । भिन्न-भिन्न विषयों पर प्रवचन होते रहते हैं । प्रभु-भक्ति, अरिहन्त का जाप, शंखेश्वर दादा के अट्ठम आदि विषयों पर प्रवचन हुए । अब आज 'गुरुभक्ति' पर प्रवचन होगा । पूज्य मुनिश्री जीतरत्नसागरजी : वह दिन पाटन के लिए बुरा सिद्ध हुआ था । प्रत्येक व्यक्ति के नेत्रों में आंसू थे, क्योंकि कलिकाल सर्वज्ञ श्री हेमचन्द्रसूरिजी का स्वर्गवास हुआ था । गुजरात पर जितना उपकार श्री हेमचन्द्रसूरिजी का है, उतना दूसरों का शायद ही होगा । अग्नि-संस्कार के समय कुमारपाल बच्चे की तरह रो रहे थे । दुःख का कारण पूछने पर बताया कि ऐसे गुरु मिलने पर (कहे कलापूर्णसूरि - ३ 6 6 6 6 6 Cas can as a 5500 5 GS 6 १९१)
SR No.032619
Book TitleKahe Kalapurnasuri Part 03 Hindi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuktichandravijay, Munichandravijay
PublisherVanki Jain Tirth
Publication Year
Total Pages412
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size12 MB
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