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________________ पतद्ग्रहस्थान ९ प्रकृतिक ५ प्रकृतिक ४ प्रकृतिक पतद्ग्रह प्रकृतियां संज्वलन चतुष्क, पु. वेद, हास्य, रति, भय, जुगुप्सा संज्वलन चतुष्क, पु. वेद संज्वलन चतुष्क संक्रमस्थान संक्रम प्रकृतियां २१ प्रकृतिक १२ कषाय, ९ नोकषाय २१ प्रकृतिक "" १३ प्रकृतिक संज्वलन चतुष्क ९ नोकषाय १२ प्रकृतिक संज्वलन क्रोधादित्रिक ९ नोकषाय ११ प्रकृतिक संज्वलनक्रोधादित्रिक ८ नो कषाय (नपु. वेद रहित) १० प्रकृतिक ४ प्रकृतिक " १० प्रकृतिक संज्वलन क्रोधादित्रिक ७ नो कषाय (स्त्री वेद रहित) "" "" संज्वलन क्रोधादित्रिक पुरुषवेद संक्रम काल सत्ता २१. अन्तर्मुहूर्त २१ प्र. अन्तर्मुहूर्त १३ प्र . अन्तर्मुहूर्त १३प्र. अन्तर्मुहूर्त १२प्र. अन्तर्मुहूर्त ११. अन्तर्मुहूर्त ११प्र. समयो. आव. द्विक ५. अन्तर्मुहूर्त स्वामी अपूर्वकरण गुण. अनि. करण गुण, द्वितीय भागपर्यन्त "" तृतीय भाग में "" "" "" अन्तरकरण में = " चतुर्थ भाग में "" " पंचम भाग में E "" "" षष्ठ भाग में ३६ [ कर्मप्रकृति
SR No.032438
Book TitleKarm Prakruti Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivsharmsuri, Acharya Nanesh, Devkumar Jain
PublisherGanesh Smruti Granthmala
Publication Year2002
Total Pages522
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size39 MB
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