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________________ गाथा - ८,९ ३५५ गाथा - १० गाथा - ११ गाथा – १२ ३५६ ३५८ ३५९ ३६० ३६१ गाथा-१३ गाथा - १४ गाथा - १५ गाथा - १६ ३६२ ३६४ गाथा - १७ ३६५ अयोगी भव के चरम समय तक रहने वाली प्रकृतियों का सत्कर्मस्वामित्व प्रकृतिस्थान सत्कर्मनिरूपण मोहनीयकर्म के प्रकृतिसत्वस्थान मिथ्यात्व से उपशान्तमोहगुणस्थान तक पाये जाने वाली मोहनीयसत्वस्थानों की संख्या पूर्वोक्त मोहनीय के सत्वस्थानों संबंधी मतान्तर नामकर्म के प्रकृतिसत्वस्थानों का परिचय नामकर्म के प्रकृतिसत्वस्थानों का गुणस्थानों में विचार नामकर्म के स्थितिसत्कर्म के भेदों की मूल प्रकृति संबंधी सादि-अनादि प्ररूपणा समकबंधोदया प्रकृतियों का स्थितिसत्व का विचार, छियासी समकबंधोदया प्रकृतियों के नाम, अनुदयबंधपरक प्रकृतियों का उत्कृष्ट स्थितिसत्कर्म, अनुदयबंधपरक बीस प्रकृतियों के नाम संक्रम से दीर्घस्थिति वाली प्रकृतियों का उत्कृष्ट स्थितिसत्व, अनुदयसक्रंमोत्कृष्ट प्रकृतियों का स्थितिसत्व जघन्य स्थितिसत्व का स्वामित्व, सामान्य से सभी कर्मों का जघन्य स्थितिसत्कर्म स्थिति भेद निरूपण अनुभागसत्कर्म निरूपण, उत्कृष्ट अनुभागसत्कर्म के स्वामी जघन्य अनुभागसत्व संबंधी स्वामित्व की विशेषता का निरूपण अनुभाग सत्वस्थान के भेदों का निरूपण प्रदेशसत्कर्म के भेद और मूल प्रकृतियों की सादिअनादि प्ररूपणा उत्तर प्रकृतियों की सादि-अनादि प्ररूपणा गाथा - १८ ३६७ गाथा -- १९ ३६९ ३७१ गाथा - २० गाथा – २१, २२ ३७२ गाथा - २३ ३७३ ३७४ गाथा - २४ गाथा - २५ ३७६ गाथा - २६ ३७७ [३०]
SR No.032438
Book TitleKarm Prakruti Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivsharmsuri, Acharya Nanesh, Devkumar Jain
PublisherGanesh Smruti Granthmala
Publication Year2002
Total Pages522
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size39 MB
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