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________________ उद्वर्तना - अपवर्तनाकरण ] [ १४३ ३. निर्व्याघातभावी अप. पूर्व से विशेषाधिक सम्पूर्ण आवलिका प्रमाण की उत्कृष्ट अतीत्थापना ४. व्याघात अप. की पूर्व से असंख्यातगुणी देशोन डायस्थिति प्रमाण उत्कृष्ट अतीत्थापना ५. उत्कृष्ट निक्षेप पूर्व से विशेषाधिक समयाधिक आवलिका द्विकोन सर्व कर्म - स्थिति प्रमाण ६. सर्व कर्मस्थिति पूर्व से विशेषाधिक उत्कृष्ट निक्षेप, उत्कृष्ट अतीत्थापना और बंधावलिकादि सहित होने से स्थिति उद्वर्तना - अपवर्तना के मिश्र अल्पबहुत्व का प्रारूप क्रम नाम अल्पबहुत्व प्रमाण १. व्याघातोद्वर्तना में सर्व स्तोक आवलिका का जघन्य अतीत्थापना - किन्तु परस्पर तुल्य असंख्यातवां भाग जघन्य निक्षेप अपवर्तना में जघन्य निक्षेप पूर्व से असंख्यातगुणा समयाधिक एक तृतीयांश । आवलिका प्रमाण अपवर्तना में जघन्य पूर्व से त्रिसमय न्यून एक समय हीन दो तृतीयांश अतीत्थापना द्विगुण आवलिका प्रमाण निर्व्याघात अप. पूर्व से विशेषाधिक सम्पूर्ण आवलिका प्रमाण उत्कृष्ट अतीत्थापना उद्वर्तना उत्कृष्ट पूर्व से संख्यात गुण उत्कृष्ट अबाधा तुल्य अतीत्थापना ६. व्याघात अप. उत्कृष्ट पूर्व से असंख्यात गुणी देशोन डायस्थिति प्रमाण अतीत्थापना ७. उद्वर्तना उत्कृष्ट निक्षेप पूर्व से विशेषाधिक एक समय एक आवलिका और अबाधाहीन सर्व स्थिति प्रमाण
SR No.032438
Book TitleKarm Prakruti Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivsharmsuri, Acharya Nanesh, Devkumar Jain
PublisherGanesh Smruti Granthmala
Publication Year2002
Total Pages522
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size39 MB
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