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________________ १०९ गाथा ११० ११२ ११३ गाथा – ७४, ७५, ७६, गुणितकाश जीव का लक्षण ७७,७८ गाथा - ७९ ज्ञानावरण, दर्शनावरण प्रकृतियों और आहारकसप्तक के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व गाथा -८० कर्मचतुष्क की अवध्यमान अशुभ प्रकृतियों के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व सातावेदनीय के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व गाथा - ८२ मिथ्यात्व और सम्यग्मिथ्यात्व मोहनीय के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व गाथा -८३ अनन्तानुबंधी कषायों के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व गाथा - ८४ नपुंसकवेद के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व गाथा - ८५ स्त्रीवेद के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व गाथा - ८६, ८७ पुरुषवेद के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व संज्वलन क्रोधादित्रिक के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व गाथा-८८ संज्वलन लोभ एवं यशःकीर्ति के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व तैजससप्तक आदि नामकर्म की वीस शुभ ध्रुववंधिनी प्रकृतियों के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व गाथा -८९ स्थिर और शुभ नामकर्म के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व, सम्यग्दृष्टि प्रायोग्य शुभ ध्रुववंधिनी प्रकृतियों के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व नरकद्विक, देवगतिनवक के उत्कृष्ट प्रदेश संक्रम का स्वामित्व गाथा - ९१ मनुष्यगतिद्विक के उत्कृष्ट प्रदेशसंक्रम का स्वामित्व गाथा - ९२ स्थावर, एकेन्द्रिय जाति, आतप उद्योत के उत्कृष्ट प्रदेश संक्रम का स्वामित्व ११४ ११५ गाथा - ९० ११७ ११७ [१४]
SR No.032438
Book TitleKarm Prakruti Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivsharmsuri, Acharya Nanesh, Devkumar Jain
PublisherGanesh Smruti Granthmala
Publication Year2002
Total Pages522
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size39 MB
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