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________________ पच्चीस और तेईस प्रकृतिक पतद्ग्रहस्थान में संक्रान्त होने वाले संक्रमस्थान व उनका कारण गाथा - २८ स्थितिसंक्रम का लक्षण ५४ गाथा – २९ बंधोत्कृष्टा, संक्रमोत्कृष्टा स्थिति का लक्षण बंधोत्कृष्टा प्रकृतियों की संख्या व नाम संक्रमोत्कृष्टा प्रकृतियों की संख्या व नाम बंधोत्कृष्टा प्रकृतियों की उत्कृष्ट स्थिति के संक्रम का परिमाण व उसका स्पष्टीकरण संक्रमोत्कृष्टा प्रकृतियों के उत्कृष्ट स्थिति के संक्रम का प्रमाण गाथा-३० दर्शनमोहत्रिक की उत्कृष्ट स्थिति का संक्रम प्रमाण तीर्थंकर और आहारकसप्तक को संक्रमोत्कृष्टा प्रकृति मानने का स्पष्टीकरण गाथा - ३१ प्रकृतियों का यत्स्थिति प्रमाण आयुकर्म की उत्कृष्ट स्थिति को बंधोत्कृष्टा मानने में हेतु। गाथा - ३२, ३३, ३४ स्वप्रकृति संक्रम योग्य प्रकृतियों का जघन्य स्थिति संक्रम प्रमाण परप्रकृति संक्रम योग्य प्रकृतियों का जघन्य स्थिति संक्रम प्रमाण गाथा - ३५ सत्तारूप प्रकृतियों का जघन्य स्थितिसंक्रम प्रमाण गाथा -३६ मूलकर्म प्रकृतियों के स्थितिसंक्रम के जघन्य आदि विकल्पों की सादि-अनादि प्ररूपणा गाथा - ३७ उत्तर प्रकृतियों के स्थितिसंक्रम के जघन्य आदि . विकल्पों की सादि-अनादि प्ररूपणा गाथा – ३८ बंधोत्कृष्टा प्रकृतियों के उत्कृष्ट स्थितिसंक्रम का स्वामित्व संक्रमोत्कृष्टा प्रकृतियों के उत्कृष्ट स्थितिसंक्रम का स्वामित्व [१०]
SR No.032438
Book TitleKarm Prakruti Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivsharmsuri, Acharya Nanesh, Devkumar Jain
PublisherGanesh Smruti Granthmala
Publication Year2002
Total Pages522
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size39 MB
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