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अमनस्क योग (३) ध्यान की सिद्धि के लिए प्राणायाम का प्रयोग किया जाता है।
१. रेचक २. पूरक ३. कुंभक
अमनस्कता की सिद्धि होने पर कुंभक का अभ्यास न करने पर भी श्वासवायु अपने आप निरुद्ध हो जाती है। प्रयत्न किए बिना भी कुंभक की स्थिति बन जाती है।
रेचक-पूरक-कुंम्भक-करणाभ्यासक्रमं विनाऽपि खलु। स्वयमेव नश्यति मरुद् विमनस्के सत्ययत्नेन।।
योगशास्त्र १२.४४
२६ जनवरी २००६