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________________ कर्ता : श्री पूज्य यशोविजयजी महाराज 2 धन दिन वेला ! धन घडी तेह ! अचिरारो नंदन जिन जदी भेटशुंजी लहेशुं रे सुख देखी मुख-चंद, विरह-व्यथाना दुख मेटशुंजी -धन०(१) जाण्यो रे जेणे तुज गुण-लेश, बीजो रे रस तेहने मन नवि गमेजी चाख्यो रे जेणे अमी लव-लेश, बाक्स-बुक्स तस न रुचे किमेजी -धन० (२) तुज समकित-रस-स्वादनो जाण, पाप कुमतने (जे) बह-दिन सेवीओजी सेवे जा करमने योगे तोहि,, वांछे ते समकित-अमृत धुरे लिख्युं जी __ -धन०(३) ताहरुं ध्यान ते समकितरुप, तेहज ज्ञानने चारित्र तेह छे जी तेहथीरे जाए सघळां पाप, ध्यातारे ध्येय-स्वरुप होयें पछेजी --धन०(४) देखीरे अद्भुत ताहरुं रुप, अचरिज भविक अ-रुपी-पद वरेजी ताहरी गत तुं जाणे देव, समरण-भजन ते वाचक जश करेजी -धन०(५) १७७
SR No.032220
Book TitlePrachin Stavanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHasmukh Chudgar
PublisherHasmukh Chudgar
Publication Year
Total Pages384
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size27 MB
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