SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 21
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ( १८ ) ॥ दादा गुरु स्तवन ॥ कुशल गुरु तुम साहिब सुखदाई तुम साहिब० ॥ परतिख तेरो मैं दीठा परच्यो पल में पीड़ा गमाई । कुशल ० मानव दानव सह कोई मानें दुनियां मांहि दुहाई । सोमवार पूनम दिन पूजत जिन घर होत बधाई। कुशल० । मालपुरे थारो थिर थानक दीपे युग प्रधान सवाई | चिन्ता चूरण आशा पूरण जिन रङ्ग सूरि सहाई । कुशल० । ३ । इति । || दादा देव का स्तवन ॥ दादो जी दीठां दौलत थाय, वांकी रे बेला न पडे दाघ । पूजो मनरली हां हो दादा कुशल सूरिंद ॥ पूजो ॥ दादो जी तुरत गमावे पीड़, दादो जी भांजे सगली भीड़ ॥ पूजो १ ॥ पूनम पूनम दिन सोमवार, श्राय जुड़ें दादा दरबार | पूजो । पूजो केसर अगर कपूर, समरतां दादो होय हजूर । पूजो० ॥ हां हो ॥ २ ॥ मुँह मांग्या बरसावें मेंह, दादो जो साधे तूठा नेह || पूजो० ॥ दादो जी राजनगर दिवान, पूज्यां बोल चढ़े प्रमाण || पूजो० ३ ॥ दादा जीरा सेवक होय, तेहने गंज न सक्कै कोय ॥ पूजो० ॥ जिन रङ्गसूरि कहे कर जोडि, कौन करे दादा जी की होड़ ॥ पूजो । दादो जी परतिख देवता दादो देश दिवान ॥ ४ ॥
SR No.032212
Book TitlePrachin Stavanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRampal Yati
PublisherUmravsinh Dungariya
Publication Year1933
Total Pages36
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy