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________________ १०] श्री प्राचीनस्तंवनावली ॥ ढाल ५ मी ॥ अश्वसेन कुल चाँदलोरे माता वामा देवी रो नंदरे साह्यबीया । थारी सारे सुरनर सेवा, हुंतो देवारे ससीयर सेवा तोरे दर्शनरी स्वामी सुरतनी बलिहारी मुरतिनी बलिहाररे साह्यबीया ॥ १ ॥ तीन भुवनको राजीयोरे, जायो जायो पार्श्वकुंवाररे सा० ॥ २ ॥ तुहिं म्हारे जीवन आत्मारे, तुहिं म्हारे जीवन आधार । तुहिं म्हारे प्राण आधाररे सा० ॥३॥ दूजा देव तुझ ऊपरेरे, ओलु गोलु वारंवार । ओल गोलु वार हजाररे सा० ॥ ४ ॥ ॥ ढाल ६ ट्ठी ॥ साँभल जिनवर विनतिजी, थें छो चतुर सुजाण । सो बोले एक बोलसीजी, करवो आप समान चिंतामणी, म्हारे तुमसुं जी प्रीत ॥ १ ॥ करवो छे स्वामी मोहे दशाजी, करवो छे साहेब आप । भवइडा पीडा टलेजी, भवभव मांगू सेव ॥ चिं० ॥ २ ॥ आज नवनिध सिद्ध हुवाजी, आज भलो शुभ दिन | दंड कलश शिष्य जैतसीजी, जैतसीनी जोड प्रमाण ॥ चिं० ॥ ३ ॥ पुंसर्ण.
SR No.032200
Book TitlePrachin Stavanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMannalal Mishrilal Chopda
PublisherMannalal Mishrilal Chopda
Publication Year1934
Total Pages160
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size11 MB
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