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________________ vwvvwvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvs. ८] . . . . श्री प्राचीनस्तवमावली आया सखरा मंडाण है सह्यां ॥जू०॥ १॥ सह्यां मोरी तीर्थ थानक तीर्थ थापियो, लीधो लीधो लक्ष्मीनो लाभ है सयां ॥ ज०॥२॥ सह्यां मोरी अन माता धन पिता, धन धन “थेरू” साय ॥ समां ॥ ज०॥३॥ ॥ दाल ३ री॥ धवल मंगल पांचे देहरारे, देव विमाण अवतार । दंड कलश धजा लव लवेरे । तील कोइ तोरण वार हर्षभर तीर्थ भेटस्यारे । आजमाने भमती २ मझार देइये तीनप्रदक्षणा सार श्रीपार्श्वनाथ जुवारीयां हर्षभर तीरथ भेटस्यां॥१॥ रणझण घंटा रणकतीरे, मांड्या खर्ग सुरबाद। मोटो तीरथ महिमा भलोरे, दीठा टले विखवाद । हर्षभर तीर्थ० ॥ २॥ समवसरण सोहामणोरे, अशोक वृक्ष अवतार । तीन छत्र शिर सोहतारे, त्रिभुवन तारणहार ॥ हर्ष० ॥३॥ ॥ दाळ चौथी॥ मुरत मोहन वेल'मुरत मोहन वेल हे, सखी
SR No.032200
Book TitlePrachin Stavanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMannalal Mishrilal Chopda
PublisherMannalal Mishrilal Chopda
Publication Year1934
Total Pages160
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size11 MB
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