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________________ जाहिर-खबर. जैनधर्मावलम्बी चतुर्विध श्री संघ (साधु श्रावक-श्राविका) आदि सर्व महानुभावों को। होकि-आपकों नवपदादि व अंजन शलाका प्र। उत्सवकी त्था विवाह वगैराशुभप्रसङ्गकी कुंकुम / / और चौपाइ, स्तवन, सिज्झाय, आदि हरेक गायनका पुस्तकें व व्यापार सम्बन्धी इंडिये, चिट्ठीयें, नोट पेपर, कार्ड, लिफाफे, चेक, रसीदें वगैरा छपाना हो, तथा घुफ शुद्ध कराना हो या दीवाली पूजन व पर्युषण क्षमापण पत्रिका, विवाह की कुंकुमपत्रियें व इंडिये बिना नामकी जोकि हरेक के काम आसके वैसे खोखे चाहिये तो तथा उजमणे का सामान, जैन-गायनकी पुस्तकें, रेतीकी घडीयें, जैन अगरबत्तीयें, कटासणे, चरवले, तीर्थंकरोती . कोव चाहिये तो नीचे रत्येकी घडीयें, जैन अगाछबीयें ) मी घडीये.जैन और छ घडीर्य, जैन रतलाम, (मालवा)
SR No.032200
Book TitlePrachin Stavanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMannalal Mishrilal Chopda
PublisherMannalal Mishrilal Chopda
Publication Year1934
Total Pages160
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size11 MB
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