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________________ ( ३०४ ) (१) ॥ स्वस्ति श्रीमन्नृपविक्रमादित्य संवत्सर समयातीत संवत् १६७१ वर्षे (२) शाके १५३६ प्रवर्त्तमाने वैशाख सुदि ३ शनौ श्रीमदागरा दुर्ग वास्तव्योपकेश (३) ज्ञातीय लोढा गोत्रे गावंशे साह जेठमल तत्पुत्र सा० राजपाल तद्भार्या श्रा० रा (४) जश्री तत्पुत्र श्री विमलाद्यादि संघकारक सं० रुषभदास तद्भार्योभयकुमा(५) रानंददायिनी रेषश्री तत्पुत्राभ्यां श्री शत्रुंजय समेतगिरि संघ महन्महन्निव्र्वा(६) ६ प्राप्तसत्कीर्त्तिभ्यां श्री कुरपाल सोनपाल संघाधिपाभ्यां ॥ सुत सं० संघराज रूपचंद पौत्र (७) सं० भूधरदास सूरदास सिवदास पदमश्री । प्रपौत्र साधारणादि परिवारयु(८) ताभ्यां श्री अंचलगच्छे पूज्य श्री ५ धर्ममूर्त्तिसूरि पट्टांभोजभास्वराणां पूज्य श्री ५ (९) श्री कल्याणसागर सूरीणामुपदेशेन श्री संभवनाथ बिंबं प्रतिष्ठापितं भव्यैः पूज्यमानं चिरं नद्यादिति श्रेयस्तुः || ( मस्तकपर) पातिसाह श्री ५ श्री जहांगीर विजयराज्ये ( ३०५ ) (१) ॥ स्वस्ति श्रीमन्नृप विक्रमादित्य समयात् संवत् १६७१ वर्षे शा(२) के १५३६ प्रवर्त्तमाने श्री आगरादुर्ग वास्तव्य उपकेश ज्ञा (३) तीय लोढा गोत्रे ..... सा० राजपाल तद्भार्या श्रा० राजश्री त (४) त्पुत्र संघपतिपदोपार्जनक्षम सं० रुषभदास तद्भा ६१ (५) र्या श्रा० रेषश्री तत्पुत्राभ्यां श्री कुंरपाल सोनपाल संघाधिपाभ्यां श्री अंचल(६) गच्छे पूज्य श्री ५ धर्ममूर्त्तिरि पट्ट श्री ५ कल्याणसागर सूरीणामुपदे (७) शेन श्री अभिनंदन स्वामि बिंबं प्रतिष्ठापितं || पुज्यमानं चिरं नंद्यात् ( मस्तक पर ) पातिसाह अकबर जलालुदीन सुरत्राणात्मज पातिसाह श्री जहांगीर विजयराज्ये ( ३०६ ) (१) || संवत् १६७१ वर्षे वैशाष सुदि ३ शनौ उसवाल ज्ञा(२) तीय लोढा गोत्रे आंगाणी वंशे सं० ऋषभदास त(३) भार्या श्रा० रेषश्री तत्पुत्राभ्यां सं० श्री कुंरपाल सं० सोन (४) पाल संघाधिपैः तत्पुत्र सं० संघराज सं० रूपचंद चतुरभुज (५) धनपालादिसहितैः श्रीमदंचलगच्छे पूज्य श्री ५ धर्ममूर्ति सूरि तत्प(६) हे श्री कल्याणसागर सूरिरुपदेशेन विद्यमान श्री रुषभानन जिन (७) बिंबं प्रतिष्ठापितं ॥ श्रीरस्तु ॥ ( मस्तकपर) पातिसाह श्री जहांगीर विजयराज्ये
SR No.032059
Book TitleAnchalgacchiya Lekh Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorParshva
PublisherAnantnath Maharaj Jain Derasar
Publication Year1964
Total Pages170
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size17 MB
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