SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 27
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ [जिनाय नमः ] [कवि-सुरजमलजी-साकीन-उदयपुर-मुल्क मेवाडकी बनाइहुई लावनी.] cresterrenterresserserirreserien विद्यासागर न्यायरत्न श्री शांतिविजयजी-बडे अणगार, संयमलिनो आपने छोडयो कुटुंबसब धनघरवार, भावनगर गुजरातके माही-शहरबडो भारी उत्तम, धन्यहै धरणी वहांकी जहां मुनिजी लियोहै जनम, धन्य पिता मानकचंदजीको-वे चलते जिनमतको धरम, थे सतवादी जिनके पुत्र कहलाये अनुपम, धन्यवाद लियातकवरकों-माता बुद्धिकी बीअसम, संस्कारसे आप आजन्मे उदयभये निजपूरवकरम, महाजन विशाओशवालथे-जूठवचन नही एकलगार, संयमलीनो आपने छोडयो-कुटुंबसबधनघरबार. विद्या.१ श्रीरी आत्माराममहाराज-जिनोमे लिये आपको है पहिचान, दीक्षालिनी साल उन्नीस और छत्तीसप्रमान, वेशाखशुक्ल दसमी गुरुवारे-हुवेसंयमी चतुरसुजान, मलेरकोट पांचालमुल्कमें जानतहै सब निखिलजहान, धर्मशास्त्रकों पढे मुनिश्वर- व्याकरणकोशको भारीज्ञान, सर्वशास्त्रकों आपने पृथक् पृथक् लिनेसबमान, पंजाब पूरव मारवाड-गुजरात मालवाको दियोतार, संयमलीनो आपने छोड्यो कुटुंब सबधनघरबार विद्या.२ Gooo her oge
SR No.032017
Book TitleNyayaratna Darpan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShantivijay
PublisherBhikhchand Bhavaji Sakin
Publication Year1915
Total Pages28
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy