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________________ ५२ ( त्रिस्तुति परामर्श. ) प्रमुख संघो वक्ति तत्सत्यं - उत - गोष्टामाहिलोक्तमिति-तत्साहाय्यायच -संघः कायोत्सर्गेणस्थितः --सा--तीर्थकरंष्पृष्ट्वा - आगताउवाचसंघः सम्यक्वादी- इतरोमिथ्यावादीनिन्हवःउसपाठकामाइनाउपर दिखला चुकेहै, देखिये ! इसमें संघने देवता बोलाने के लिये कायोत्सर्ग किया है - या नही ? अगर किया है - तो - बतलावे दुर्बलिकापुष्पजैनाचार्य वगेरासंघकों - आराधक कहना - या - - विराधक ? लेखक लिखता है कि देवता की सहायता - न-लेनवाले श्रावक कहलाते थे - तो अब बतलावे चतुर्विधसंघ में श्रावक है-या- नही ? - और उनश्रावकोंकों श्रावकमानते हो - या नही ? सबुतहुवा लेखककोरीबातें बनानेवाले है, - सुभद्रा - सतीने - देवताकीसहाय्यसे चंपानगरी के दरवाजे खोलेथे, जिस बातकों आमजैनसंघ - जानता है, - औरं - सुभद्रा - सोलह-सतीयों में एकसतीथी - यहभी किसीजैनसेंछीपीबातनही, बतलानाचाहिये ! अब लेखक - शुभदासतीकों-श्राविका क हते हैं - या नही ? तीनस्तुति प्राचीनता किताबसफह ( ४ ) पर तेहरीरहै कि - बीतराग भगवान की वैरिणी - व्यंतरदेवो कीपूजाका मूल - चोथीथुइ है, क्योंकि पहली - पेंतालीस आगमोकी पंचांगी में तीनही स्तुति कहीं है, ( जवाब . ) किसीजैन आगकी पंचांगीमेंप्रतिक्रमणके वख्त तीनथुइ करना नही कही, और यहभी किसी जैन आगमकी पंचांगीमें-नहीलिखाकि - चोथीथुइ - वीतरागदेवकी वैरिणी है, अगर कोइ तीनथुइमाननेवालोमें जैन आगमकी पंचांगीका इल्मरखताहो- सामने आवे, और बतलावेकि- किसपंचांग में चोथीथुइ वीतरागदेवकी वैरिणी लिखिहै ? और किस पंचांगीमें लिखा कि- प्रतिक्रमण में तीनथुइकरना, अगर इसबात
SR No.032003
Book TitleTristuti Paramarsh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShantivijay
PublisherJain Shwetambar Sangh
Publication Year1907
Total Pages90
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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