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________________ सेठियाजैनग्रन्थमाना हानि पहुँचाते रहते हैं / कई लोग कठिन गर्मी से आकर गर्म गर्म शरीर के रहते हुए ठण्डा जल पीकर मृत्यु के मुख में तक पतित हो जाते हैं / कई लोग सरदियों में कमरे में कोयले सुलगा कर कमरे के तमाम दरवाजे बन्दकर सो गये और दूसरे दिन मरे पाये गये। सत्पुरुषों के कर्नव्य-प्रदर्शक 35 वाक्य१. न्याय से धन कमाना / 2 अन्य गोत्र के समान दर्जे वाले की कन्या लेना व देना / शिष्टाचार तथा नीतिमार्ग की प्रशंसा करना / 4 काम क्रोध लोभ मोह मद हर्ष इन छह शत्रुओं को वश में करना। इन्द्रियों को वश में करना / 6 लोकापवाद से डरते हुए पाप से दूर रहना / 7 देशाचार तथा कुलाचार का उल्लंघन न करना / 8 किसी की निन्दा न करना / है सत्पुरुषों की प्रशंसा करना / 10 घर में आने जाने के अनेक द्वार न रखना / 11 अपवित्र स्थान में घर न बनाना / 12 अत्यन्त गुप्त स्थान में न रहना /
SR No.023531
Book TitleNiti Shiksha Sangraha Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBherodan Jethmal Sethiya
PublisherBherodan Jethmal Sethiya
Publication Year1927
Total Pages114
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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