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________________ शब्दार्थ--पमिकमण करता एवा गृहस्थने पण सात वखत . अने न करनाराने पांच वखत चैत्यवंदन कर. वली जघन्यथी तोत्रणे संध्याये पूजाना अवसरे त्रण वखत चैत्यवंदन करवू. हवे आशातनानां नाम, २४ मुं द्वार कहे जे. तंबोल पाण जोयण, वाहण मेडम सुअणनिष्ठ्वणं॥ मुत्तुचारं जुधे, वजे जिणनाद ऊगईए ॥ ६ ॥ शब्दार्थः--तंबोल खावं, पाणी पावं, जोजन करवू, जोमा पहेरवा, कामचेष्टा करवी, शयन करवं, थुकवू लघुनीति करवी, वमीनीति करवी अने जूवटुं रमवू, ए दश आशातना जिनमें दिरमां त्यजवी. ॥ ६१ ॥ हवे देव वांदवानो विधि कहे . इरि नमुक्कार नमुत्रुण, अरिहंत थुई लोग सच थुई पुरक थुइ सिहा वेा थुइ, नमुन जावंति थय जयवी६२ ... शब्दार्थः-इरियावहि, नवकार,नमुत्थुणं, अरिहंत चेश्याणं, कही एक स्तुति कहेवी. पबी लोगस्त, सवलोए कहो स्तुति कहेवी. पनी पुरकरवर अने स्तुति कदेवी. पर सिसाणं बुझाणं, वेयावच्चगराणं श्रने स्तुति कहेवी. पो नमुत्थुरा, जावंतिचेश्या इंधने स्तुति कहीने जेवट जयवीयराय पूर्ण कदेवा. ॥ ६॥ . हवे समाप्त करता बता फल कहे . .. सबोवादिविसुई, एवं जो वंदए सया देवे॥ देविंदविंदमहिअं, परमपयं पाव लहुसो ॥ ६३ ॥ :... शब्दार्थः–पा प्रमाणे सर्व नपाधिया रहित एवो जे माणस निरंतर रिहंत देवनी वंदना करे ले ते सोना समूहे पूजेलां परमपदने तुरत पामे . ॥३॥
SR No.023442
Book TitlePrakaranmala
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHarishankar Kalidas Vadhvanwala
PublisherBhogilal Tarachand Shah
Publication Year1909
Total Pages242
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size23 MB
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