SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 76
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ६८ शीलोपदेशमाला. 66 हे राजन् ! हाथीनां बंधन बूढे ए कांइ आश्चर्य नथी, पण सूतरना तांतणाथ बांधेला पेला बंध ऋटवा ए दुस्सह मानुं तुं.” एम कही ने तेणे पोतानुं सर्व वृत्तांत कयुं; एटले सर्व सजा हर्ष पामी अने अजयकुमार पण कुमारनां वखाण करवा लाग्यो . श्राकुमारे अजयकुमारने कयुंके, “ तमे म्हारा उपर श्री आदीश्वर जगवाननी प्रतीमा मोकली कयो को उपकार नथी कस्यो अर्थात् सर्व प्रकारनां उपगार या बे, कारण के जे प्रतिमाना प्रसादथी हुं धर्मने उलखी चारित्रने पाम्यो लुं. हे अजयकुमार ए सर्व व्हारो प्रसाद ठे." एवी श्राश्चर्यकारक ते कुमार मुनिनी कथा सांगली घणो आनंद पामेलो श्रेणिकराजा अजयकुमार सहित नगरमां पाठो गयो धने थार्डकुमार पण ते राजगृह नगरमां श्री वीर खामीना समवसरणनां दर्शन करी कृतार्थ थइ मनुष्य जन्मना कर्मनो क्षय करी मोक्ष पाम्या. ॥ इति रुद्रपक्षीय गठमां जहारक श्री संघ तिलक सूरिनी पाटे आभूषणरूप थएला श्री सोमति लक सूरिए रचेली शीलोपदेशमालामां श्राकुमारानी कथा समाप्ता ॥ सामान्यनी वात तो दूर रही, परंतु श्री जिनेश्वरोए दीक्षा श्रापेला पुरुषोने पण स्त्रीजना संगथी दोष प्राप्त थाय बे ते कड़े बे. प्रतिदिवसं दशदशबोधकोऽपि श्री वीरनाथ शिष्योऽपि पेइदिवस दददेहबो - दगोवि सिरिवीरनार्दसी सोवि ॥ वेश्यायाः सुतोऽपि सन् नंदिषेणमुनिः सेनिवि संतो, वेसाए नंदिसेमुणी ॥ ३१॥ शब्दार्थ - ( प दिवस के० ) दिवस दिवसप्रत्ये ( ददबोह गोवि के० ) दश दश पुरुषोने बोध करनार एवा, तथा (सिरिवीरनाहसी सो वि के० ) श्री वीरखामीना शिष्य थएला एवाय पण अने ( से पिश्रसुविसंतो ho ) श्रेणिक राजाना पुत्र बतां पण ( नंदिसेणमुणी के० ) नंदिषेण मुनि ( वेसाए के० ) वेश्याना घरने विषे रह्या हता. ॥ ३१ ॥ विशेषार्थ - दिवस दिवस प्रत्ये (इम्मेशां ) दश दश पुरुषो ने बोध आपी चारित्र ग्रहण करावनार, श्रीमहावीर स्वामीना हाथथीज दीक्षा
SR No.023404
Book TitleShilopadesh Mala
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHarishankar Kalidas Shastri
PublisherJain Vidyashala
Publication Year1900
Total Pages456
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Gujarati & Book_Devnagari
File Size15 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy