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________________ करेखी वेदना . केटलीएक नरकमां स्वन्नाविक क्षेत्र प्रत्नावे वेदना .जे जे आकरां पाप करे तेनां फल नरकमां लोगक्वानां . आयुष्य वधारेमां वधारे तेत्रीस सागरोपमर्नु , तेमां असंख्यातो काल जाय, तेटला काल सुधी उख नोगववानुं ठे अने मनुष्यमां विषयतुं अल्प काल सुख मानेतुं मागवू. वस्तुपणे तो विषयमा सुख नश्री, पण अज्ञानपणे सुख मानी विषय नोगवे ठे अने तेनां फल जीव नरकमां नोगवे . ए नरकना जीवने दश प्राण ने, उ पर्याप्ति , ते बांधीन रह्यो होय त्यां सुधी अपर्याप्तो कहेवाय ने पूर्ण बांधे एटले पर्याप्तो. ते पर्याप्ता अने अपर्याप्ता एमबे नेद गणतां चनद नेद थाय, एटले चनद प्रकारना नारकी. . ए एकेंज्थिी पंचेंडि सुधीना सर्वे नेद नेगा करीये त्यारे चारे गतिना कुल ५६३ नेद थाय ते नीचे प्रमाणे. १एन्नेद देवताना ३०३ मनुष्यना नेद. तिर्यंचना नेद १५ नारकीना नेद. - एम बधा मली सामान्यथी जीवना ५६३ नेद थाय डे विस्तारथी तो जीवना नेद तथा जीवनां स्वरूपनुं वर्णन करता घायुष्य पण पदोचे नही एटलुं वर्णन शास्त्रमा करेलु डे, माटे विस्तार रुची जीवोए शास्त्र अभ्यास करी जागी लेवा, पण ज्यां सुधी अज्ञानतुं जोर ले त्यां सुधी जीवने वीतराग नाषित शास्त्र जोवानुं तथा सांजलवामन थशे नही, एम करतां जबराश्यी वा शरमथी सांजलशे तो श्रक्ष करशे नहीं तेनुं कार‘ण एटलुंज के पूर्व नवनी विपरीत श्रानी संज्ञा चालीआवे बे, तेना जोरथी साची वस्तु रुचे नही. नन्मार्गनी रुची थाय. विपरीत वस्तु उपर कल्पित न्याय जोमी तेनी श्रम करे. बीजा जीवने पण कुयुक्ति करी समजावी नन्मार्गमां पामे अने तेवीज रीते अनेक जूदा जूदा धर्मो थर गया , अने जे माणस जे ध.
SR No.023346
Book TitleAdhar Dushan Nivarak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnopchand Malukchand Sheth
PublisherAnopchand Malukchand Sheth
Publication Year1903
Total Pages232
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size18 MB
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