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________________ क्र. प्राकृत संस्कृत हिन्दी . 23. 24 27. सो पाज्जइ । स पिबति । वह पीता है। तुं गाज्जेसि । त्वं गायसि । तू गाता है। तुम्हे नच्चेज्जा । यूयं नृत्यथ । तुम नृत्य करते हो। अहं छज्जेज्जा। अहं राजे । मैं सुशोभित होता हूँ। ते नस्सेज्ज । ते नश्यन्ति । वे नष्ट होते हैं। तुज्झे पाएज्जाह । यूयं पिबथ । तुम पीते हो। अम्हे सडेज्जा । वयं शीयामहे । हम क्षीण होते हैं। तुम्हे दुवे डहेह । । युवां द्वौ दहथः । | तुम दो जलाते हो । हिन्दी वाक्यों का प्राकृत एवं संस्कृत अनुवाद क्र. | हिन्दी । प्राकृत संस्कृत | वे दो सिद्ध होते हैं। | ते वे सिज्झेज्जा । | तौ द्वौ सिध्यतः । 2. | वह विस्तार करता है । | सो तड्डेज्जा । स तनुते । | हम पूजा करते हैं। | अम्हे अच्चेज्जे । वयमर्चयामः । तुम दो छिड़कते हो। तुज्झे दो सिंचेज्जा । युवां द्वौ सिञ्चथः । तुम उत्पन्न होते हो । । तुम्हे जाएज्जाह । यूयं जायध्वे । वे खाते हैं। ते खाएज्जइरे । ते भुअते । तू खेद करता है। तुं मिलाएज्जसि । त्वं म्लायसि । 8. | तू जीता है। तुं जीवेज्ज । त्वं जीवयसि । | तुम दो युद्ध करते हो || तुब्भे दो जुज्झेज्ज । युवां द्वौ युध्येथे । तू बोध पाता है। तुं बुज्झेज्जा । त्वं बुध्यसि । 11. तू खड़ा रहता है। तुं ठाएज्जसि । त्वं तिष्ठसि । 12.| तुम सब ध्यान करते हो । तुब्भे झाएज्जह । यूयं ध्यायथ । 13. | मैं उत्पन्न होता हूँ। | हं जाएज्जामि । अहं जाये। 14.| वह देता है। सो दाएज्जइ । स ददाति । 15.| मैं भूलता हूँ। हं भुल्लेज्ज । अहं भ्रश्यामि । 16.| वह ग्लानि पाता है ।। | सो गिलाएज्जह । स ग्लायति । वह खेद करता है। NRRRRRRRI | | - No + ७ Go o PF - १६ -
SR No.023126
Book TitleAao Prakrit Sikhe Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaysomchandrasuri, Vijayratnasensuri
PublisherDivya Sandesh Prakashan
Publication Year2013
Total Pages258
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size36 MB
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