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________________ 11. परा/पला (परा) उल्टा, वापिस. . उदा. परा + जय = पराजयइ = वह हारता है। परा + भव् = पराभवइ = वह पराभव करता है (हराता है)। पला + अय् = पलायइ = वह भागता है. 12. परि/पलि-(परि) चारों तरफ, विशेष, परिवर्तन होना. उदा. परि + तूस् = परितूसइ = वह विशेष खुश होता है । परि + वद्द = परिवट्टइ = वह परिवर्तन करता है. 13. पडि/पति/परि/पइ-(प्रति) सामने, उल्टा. उदा. पडि + भास् = पडिभासइ = वह सामने जवाब देता है । पड् + जाण् = पइजाणइ = वह प्रतिज्ञा करता है । 14. प (प्र) आगे, प्रकर्ष. उदा. प + या = पयाइ = वह आगे जाता है. . प + यास् = पयासेइ = वह विशेष चमकता है, प्रकाशित होता है। 15. वि-(वि) विशेष, निषेध, विरोधार्थ. उदा. वि + याण् = वियाणेइ = वह विशेष जानता है । वि + स्मर् = विस्सरइ/वीसरइ= वह भूलता है । वि + सिलिस् = विसिलिसइ = वह वियोग पाता है। 16. सं. (सम्) अच्छी तरह. उदा. सं + गच्छ् = संगच्छइ = वह अच्छी तरह मिलता है । 17. निर्/नि/नी-(निर) अवश्य,अधिकता, निषेध. निर + जिण = निज्जिणेइ = वह अवश्य जीतता है | . निर् + णे = निण्णेइ = वह अवश्य करता है । निर् + इक्ख = निरिक्खेइ = वह निरीक्षण करता है, वह शोध करता है । 18. दुर/दु/दू (दुर) दुःख, दुष्टता अर्थ में दुर् + लंघ् = दुल्लंघेइ = वह बड़ी मुश्किल से उल्लंघन करता है । दुर् + सह = दुस्सहेइ / दूसहेइ = वह बड़ी मुश्किल से सहन करता है । दुर् + आयार = दुरायार= दुष्ट आचरण. दुर् + आलोग = दुरालोग = बड़ी मुश्किल से दिखाई दे ऐसा । उपसर्गसहित उपयोगी धातु अइ + चर् (अति + चर) दोष लगाना, अणु + सर (अनु + सृ) अनुसरण करना अतिचार लगाना. अहि + ज्ज् (अधि + इ) पढ़ना. अणु + जाण् (अनु + ज्ञा) आज्ञा देना. नि + ण्हत् (नि + ह्र) छिपाना. - २९ - -.
SR No.023125
Book TitleAao Prakrit Sikhe Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaykastursuri, Vijayratnasensuri
PublisherDivya Sandesh Prakashan
Publication Year2013
Total Pages326
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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