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________________ भविअ (भव्य, योग्य जीव) सइंदिय (स-इन्द्रक) इन्द्रियसहित भव सयल (सकल) पूर्ण, सब मूग (मूक) गूंगा सप्पाण (सप्राण) प्राणसहित मू सासय (शाश्वत) नित्य, अविनश्वर वियंभिय (विजृम्भित) खिला हुआ, विकसित सामासिक शब्द जीवाजीवाइ (जीवाजीवादि) जीव- | पाययकव्व (प्राकृतकाव्य) प्राकृतकाव्य अजीव आदि नौ पदार्थ मणवल्लह (मनोवल्लभ) मन को प्रिय दूसमसमय दुःषमसमय) दुःषमकाल मरणभय (मरणभय) मृत्यु का भय दुस्समसमय) | वसुदेवपुत्त (वसुदेवपुत्र) वसुदेव का पुत्र धणहरण (धनहरण) धन का हरण | सकुडुंबय (सकुटुम्बक) कुटुम्बसहित करना | सव्वायर (सर्वादर) संपूर्ण आदरसहित पाणिगण (प्राणिगण) जीवों का समुदाय अव्यय अहो (अहो) शोक, आश्चर्य, प्रशंसा, पुणरुत्तं (पुनरुक्तम् दे.) बारबार आमन्त्रणादि अर्थ में |सयं (स्वयम्) स्वयं, आप, खुद . • अलाहि। (दे. अलम्) निवारण, | सहा (सर्वथा) सभी प्रकार से अलं । निषेध, पूर्ण, बस हंतूण (हत्वा) हत्या करके (संबं-भूत. कृ.) धातु अणु + सास् (अनु + शास्) शिक्षा देना, |x जन् । (यापय) बिताना, शरीर का उपदेश देना, आज्ञा करना x जा पालन करना अप्प् । (अर्पय) अर्पण करना, जम्प (कथ्-जल्प) बोलना, कहना x पणाम भेंट देना |x टव (स्थापय) स्थापन करना उम्मूल (उद् + मूल) मूल से उखेड़ना |x ढक्क्। (छादय्) ढकना, आच्छादन x उल्लाल) (उद् + नामय्) ऊँचा छाय् । करना x उन्नाम् । करना, ऊपर घुमाना x उन्नाव ) . इस अव्यय के योग में तीसरी विभक्ति रखी जाती है । -१९०
SR No.023125
Book TitleAao Prakrit Sikhe Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaykastursuri, Vijayratnasensuri
PublisherDivya Sandesh Prakashan
Publication Year2013
Total Pages326
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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