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________________ मूल तथा भाषांतर. (१५३) द्वाने विषे ( क्षेत्रादि ) सर्वे द्वारने विषे सर्वत्र अनन्ता कहेवा. क्षेत्र अने स्पर्शना पूर्वनी पेठे काल अनादि रूप अनन्त कहेवो. तेथी करीने अंतरनो असंभव होवाथी अंतर न कहेवु. ३० हवे बाकी रहेल अल्पबहुत्व द्वार परंपर सिद्धने विषे कहे छेसामुद्द दीव जल धल, धोवा संखगुण थोव संखगुणा । उड्डू अह तिरिअलोए, थोवा दुनि पुण संखगुणा ॥ ३१ ॥ लवणे कालोअम्मि य, जंबुद्दीवे य धायई संडे । पुक्खरवर दीवडे, कमसो थोवा उ संखगुणा ॥ ३२ ॥ हेमवंते हेमवए, महहिमवं कुरुसु हरि निसढ भरहे । संखगुणाय विदेहे, जंबु द्दीवे समा सेसे ॥ ३३ ॥ लवणे - लवण समुद्रमां कालोअम्मि- कालोदधिमां जंबुद्दीव-जंबुद्वीपमां धायई संडे - धातकीखंडमां सामुद्द- समुद्र दीव-द्वीप जल पाणी थल-स्थल थोवा-थोडा संखगुण संख्यातगुणा उड़-ऊर्ध्व अह- अधो तिरिअ-तोर्छा दुनि-यंने पुक्खरवर- पुष्करवर दीवडे - दीपार्ध- अर्ध ૨૦ हेमवंते- हेमवंत पर्वत हेमवए-हेमवंत क्षेत्र महहिमवं - महाहिमवंत कुरुसु- देवकुरु हरि - हरिवर्ष द्वीपमां कमसो- अनुक्रमे समा-सरखा सेसे- बाकीना अर्थ – समुद्र, द्वीप, जल अने स्थलमां थोडा, संख्यातगुणा, तीर्छालोकमां अनुक्रमे थोडा अने संख्यातगुणा उर्ध्व, अधो अने थोडा अने वे ठेकाणे संख्यातगुणा. ३१. निसढ - निषधपर्वत | भर-भरत क्षेत्र म विदेहे महाविदेहमां लवण अने कालोदधि, जंबुद्वीप अने धातकीखंड तथा पुष्कवर द्वीपार्धमा अनुक्रमे थोडा अने संख्यातगुणा. ३२. जंबुद्वीपमा हिमवंत पर्वत, हेमवंत क्षेत्र, महाहिमवंत पर्वत, देव
SR No.023119
Book TitlePushpa Prakaran Mala
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPurvacharya
PublisherJinshasan Aradhana Trust
Publication Year
Total Pages306
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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