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(स) शौरसेनी (जैन) साहित्य ( ई० स० १०० से १५०० तक )
'शौरसेनी साहित्य' के विषय निम्न प्रकार से है :
(१) सिद्धान्त और कर्म ( षट्खंडागम, धवला, महाधवला, कषायप्राभृत, प्रवचनसार, समयसार, पंचास्तिकाय, गोम्मटसार, द्रव्यसंग्रह, इत्यादि)
(२) आचार, आराधना, प्रायश्चित्त (मूलाचार, नियमसार, भगवती - आराधना, वसुनंदि - श्रावकाचार, छेदपिण्ड इत्यादि)
संग्रह )
(३) नय (नयचक्र - देवसेनसूरि, बृहन्नयचक्र - माइल्लधवल) (४) भूगोल - खगोल- गणित (त्रिलोकप्रज्ञप्ति, जम्बुद्वीपप्रज्ञप्ति
(५) ध्यान (मोक्षप्राभृत द्वादशानुप्रेक्षा )
(द) प्राकृत और महाराष्ट्री (जैन) साहित्य ( ई० स० १०० से १५०० तक) (१) जैनधर्मी महाराजा खारवेल का प्राकृत शिलालेख 'महाराष्ट्री प्राकृत' साहित्य निम्न प्रकार से उपलब्ध है ( २ ) पुराण - चरित ( पउमचरिय, जंबूचरिय और अनेक तीर्थंकर चरित)
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(३) चरितसंग्रह (चउप्पन्नमहापुरिसचरिय (गद्य-पद्य), कहावलि (गद्य), इत्यादि)
(४) रोमान्स कथा ( तरंगलोला, वसुदेवहिंडी, कुवलयमाला, इत्यादि)
(५) उत्तम काव्य ( कुवलयमाला, सुरसुन्दरीचरिय इत्यादि)
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