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________________ छोटा शहर है अच्छी जान पहचान है अतः मेने रौब डालने के लिये कहा फुफासा प्लेटफॉर्म टिकट लेने की कोई जरुरत नहीं है यहाँ सभी मुझे जानते है जब की उस वक्त प्लेटफॉर्म टिकट ५० पैसै का आता था उन्होने कुछ नहीं कहा । बस कहा प्लेटफॉर्म टिकट खरीदो । फिर घर आकर समझाया कि हम ५० पैसे की चोरी कर रहे है और उफर से रौब गाँठ रहे है और इसे अपनी होशियारी समझ रहे है। यह चोरी है ऐसा कभी मत करना, उनकी वह बात मेरे जीवन का एक टर्निंग पाईन्ट था। उनकी छोटी सी बात ने इतना बडा संदेश दिया कि आज भी जब भी कहीं पार्किंग, प्लेटफॉर्म इत्यादि का शुल्क चुकाता हुँ तो अचानक उनकी याह आ जाता है। चरित्र निर्माण में उनकी इसी तरह की छोटी छोटी सी बातो ने मेरा जीवन का तरीका ही बदल दिया । माणक सा. का अल्पायु (५२ वर्ष में) ०५/फरवरी/२००१ में निधन हो गया । जब उनका निधन हुआ उसके पुर्व उन्हे १३ दिन तक बॉम्बे हॉस्पीटल में इलाज के लिये भर्ती रखा गया था तब वहीं पर प्रतिदिन मुंबई जैसे शहर में जहाँ किसी के पास किसी के लिये समय नहीं है उनके लिये रोज शाम एवं सुबह मिलने को करीबन २०० आदमी नीचे बैठे रहते थे। हम उन्हे समझाते थे फिर भी लोग घर नहीं जाते थे । वहीं बैठे रहते थे । पहले मै यह समझाता था कि माणक सा. सिर्फ मेरे है व मै ही उनके सबसे करीब हूँ और उनकी जिन्दगी में भी ऐसा ही है परन्तु मेरा यह भी भर्म टुट गया जब उनके निधन के पश्चात् सेकडो लोगो से मै मिला जो यही कह रहे थे कि तो सिर्फ उनके थे। उनके सबके जीवन मे सबसे प्रिय, सबस नजदीकी व्यक्ति अघर कोई था तो वे श्री माणक सा. थे। यद्यपि माणक सा. आज वो हमारे बीच नहीं है परन्तु उनके बताए मार्ग पर हम सभी उनकी यादों के सहारे आगे बढ़ रहे है। ये सभी यादें चिरस्मरणीय रह कर पग-पग पर हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी। उनकी धर्मपत्नी लता जी मेरी भुआ है धर्म के मार्ग पर बहुत आगे बढ गई, उदारता उनके रोम-रोम में बसी हुई है । उनका पुत्र आकाश सच मे यथा नाम तथा गुण आकाश की तरह पुरे परिवार को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है । उनके छोटे भाई श्रीवल्लभजी भंशाली का नाम पूरे दश में प्रामामिक, देश हितचिंतक के रुप में जाना जाता है। निवेश बाजार में उनके विचारो को अलग रूप से देखा जाता है एवं श्री
SR No.022860
Book TitleJain Ras Vimarsh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAbhay Doshi, Diksha Savla, Sima Ramhiya
PublisherVeer Tatva Prakashak Mandal
Publication Year2014
Total Pages644
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size14 MB
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