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________________ मियापुत्तीयं [-१९८६ तिव्वचण्डप्पगाढाओ घोराओ अइदुस्सहा। महन्भयाओ भीमाओ नरपस वेइया मए ॥७९॥ जारिसा माणुसे लोए ताया दीसन्ति वेयणा। एत्तो अणन्तगुणिया नरपलं दुक्खवेयणा ॥७३॥ सव्वमवेस अस्साया वेयणा वेड्या मए । निमेसन्तरमित्तं पिजं साया नत्थि वेयणा ॥७४॥ तं बिन्तऽम्मापियरो छन्देणं पुत्त पव्वया । नवरं पुण सामण्णे दुक्खं निप्पडिकम्मया ॥७॥ सो बेह अम्मापियरो एवमेयं जहाफुडं। पडिकम्म को कुणई अरण्णे मियपक्खिणं ।। ७६॥ एगभूए अरण्णे व जहा उ चरई मिगे। एवं धम्म चरिस्सामि संजमेण तवेण य ॥ ७७॥ जया मिगस्स आर्यको महारण्णमि जायई। अञ्चन्तं रुक्खमूलम्मि को 5 ताहे तिगिच्छई ॥ ७८॥ को वा से ओसहं वेई को वा से पुच्छई सुहं । को ले भत्तं व पाणं वा आहरितु पणामए ॥७९॥ जया य से सही होइ तया.मच्छड गोयरं। : मत्तपाणस्स अट्ठाए वल्लराणि सराणि य ॥ ८०॥ खाइत्ता पाणियं पाउं वल्लरेहिं सरोहिय। मिगचारियं चरित्ताणं गच्छई मिगचारियं ॥८१॥ एवं समुटिओ मिक्खू एवमेव अणेगए । मिगचारियं चरित्ताणं उई पक्कमई दिसं॥८२॥ जहा मिगे एग अणेगचारी अणेगवासे धुवगोयरे य। एवं मुणी गोयरियं पविढे नो हीलए नो वि य खिसएज्जा ॥८३॥ मिगचारियं चरिस्सामि एवं पुत्ता जहासुहं । अम्मापिईहिऽणुनाओ जहाह उवहिं तओ॥८४॥ मियचारियं चरिस्सामि सम्वदुक्खविमोक्खणि। तुम्भेहिं अम्बऽणुनाओ गच्छ पुत्त जहासुहं ॥८५॥ एवं सो अम्मापियरो अणुमाणित्ताण बहुविहं । ममत्तं छिन्दई ताहे महानागो व्व कंचुयं ॥८६॥
SR No.022572
Book TitleUttaradhyayan Sutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorR D Wadekar, N V Vaidya
PublisherFergussion College
Publication Year1954
Total Pages132
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_uttaradhyayan
File Size10 MB
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