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________________ औपपातिकसूत्रम् [ Sut. 74 आरंभसमारंभेणं वित्ति कप्पेमाणीओ अकामबंभचेरवासेणं तामेव पइसेज्जं णाइक्कमंति, ताओ णं इत्थियाओ एयारूवेणं विहारेणं विहरमाणीओ बहूई वासाई सेसं तं चेव जाव चउसंहिं वाससहस्साई ठिई पण्णत्ता ॥ SUTRA 73. 5 से जे इमे गामागर जाव सनिवसेसु मणुया भवंति, तं जहा-दगबिइयां दगतइयाँ दगसत्तमा दगएकारसमा गोय. मगोव्वइयगिहिधम्मधम्मचिंतगअविरुद्धविरुद्धवुडसावगप्पभितयो तोस णं मणुयाणं णो कप्पति इमाओ नव रसविगईओ आहारत्तएँ, तं जहा-खीरं दहिं णवणीयं 10 सप्पिं तेल्लं फाणियं महुँ मज्जं मंसं, णो अँण्णत्थ एकाए सरिसवविगईए, ते णं मणुया अप्पिच्छा तं चेव सव्वं णवरं चउरासीइं वाससहस्साई ठिई पण्णत्ता ९। SUTRA 74. से जे इमे गंगाकूलगवाणपत्था तावसा भवंति, तं जहाहात्तिया पोत्तिया कोत्तिया जण्णई सडई वॉलई हुंबउठा 15 दंतुक्खलिया उम्मज्जगा सम्मज्जगा निमज्जगा संपक्खाला दक्षिणकूला उत्तरकूलगा संखधमगा कूलधमगा मिगलुद्धगा हत्थितावसा उदंडगा दिसापोक्खिणो वाकवासिणो अंबुवासिणो वेलवासिणो जलवासिणो रुक्खमूलिया अंबुभाक्खणो वाउभक्खिणो सेवालभक्खिणो मूलाहारा कंदाहारा तयाहारा 20 पत्ताहारा पुप्फाहारा बीयाहारा परिसडियकंदमूलतयपत्त १सट्टि. २ B. दगबीया. ३ B.'ततीया. ४ A. °रित्तिए. ५ B. कप्पइ. ६ A. णण्णत्थ, ७A. सर.८ A. घालई.९ A डंप १० A. बिल ११ only in A. १२ Not in I
SR No.022570
Book TitleOvavaiya Suttam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorN G Suru
PublisherN G Suru
Publication Year1931
Total Pages104
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aupapatik
File Size6 MB
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