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________________ 5 Sut. 44-] औपपातिकसूत्रम् [कचित्-महामेहमिव ] गुलगुलंतं मणपषणजइणवेगं भीमं संगामियाओज्ज आभिसेक्कं हत्थिरयणं पडिकप्पेइ २ ता हयगयरहपवरजोहकलियं चाउरंगिणिं सेणं सण्णाहेइ जेणेव बलवाउए तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता एयमाणत्तियं पच्चप्पिणइ ॥ SUTRA 43 तए णं से बलवाउए जाणसालियं सदावेइ २ ता एवं वयासी-खिप्पामेव भो देवाणुप्पिया ! सुभदापमुहाणं देवीणं बाहिरियाए उवठाणसालाए पाडियक्कपाडियकाई जत्ताभिमुहाई जुत्ताइं जाणाई उवठवेहि २ त्ता एयमाणत्तियं पच्चप्पिणाहि ॥ ___10 SUTRA. 4.4. तए णं से जाणसालिए बलवाउयस्स एयमठं आणाए विणएणं वयणं पडिसुणेइ २ ताजेणेव जाणसाला तेणेव उवागच्छइ तेणेव उवागच्छित्ता जाणाई पच्चुवेक्खेइ २ त्ता जाणाई संपमज्जेइ २ ता जाणाई संवटेइ २ त्ता जाणाई णीणेइ २ ता जाणाणं दूसे पवी-15 णेइ २ त्ता जाणाइं समलंकरेई २ ता जाणाई वरभंडगमंडियाई करेइ २ ता जेणेव वाहणसाला तेणेव - वागच्छइ २ ता वाहणसालं अणुपविसइ २ त्ता वाहणाई पच्चुवेक्खेइ २ त्ता वाहणाई संपमज्जइ २ त्ता वाहणाई णीणेइ २ ता वाहणाई अप्फालेइ २ त्ता दूसे पवीणेइ २ 20 त्ता वाहणाई समलंकरेइ २ त्ता वाहणाई वरभंडगमंडियाई १ Noted in L. २ L and B 'गुलेन्तं.-३ L Reads 'याओग्गं, and notes 'याओझं. B संगामियआयोग. ४ L प्पिणाति. ५ B °मेज्जेइ. ६ । 'कारेइ.
SR No.022570
Book TitleOvavaiya Suttam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorN G Suru
PublisherN G Suru
Publication Year1931
Total Pages104
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aupapatik
File Size6 MB
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