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________________ ___ पतिः अस्य ग्रन्थस्य शोधनपत्रम् । अशुद्धिः शुद्धिः समवाउ समवाओ ततो तत्तो समवायो वा पंचानां समवायो पञ्चानां पंचास्तिकायका [पञ्चानां] पंचास्तिकायका सो समय है. सो [समय ] समय है धमाधमा धम्माधम्मा पृथकता पृथक्ता [अन्योऽन्यं] [अन्योन्यस्य] ध्रुव धुव गुणपर्यायश्रित गुणपर्यायाश्रित पज्जायाः पज्जाया [उत्पत्ति] [उत्पत्तिः ] दूयोरनन्यभूतं द्वयोरनन्यभूतं श्रमणा श्रमणाः णस्सदि जायदे णस्सदि ण जायदे [न जायते] [न अन्यः जायते और न उत्पन्न होता। और न अन्य उत्पन्न होता । गतिनामः गतिनाम [देव मनुष्यः इति] [देवः मनुष्यः इति] [गतिनामः] [गतिनाम] सुष्टुः अनुबद्धाः सुष्वनुबद्धाः [जीवाः] (आकाशः) आकाशम्] [कायौ] [अस्तिकायौ] फिर कैसा है निश्चयकाल ? फिर कैसा है निश्चयकाल ? [अमूर्तः] अतीन्द्रिज्ञानगम्य अमूर्तीक पदार्थ है । और बीतजायतो बीतजाय [ ततः दिवारानं] तो उससे [क्षिप्रं] [वा क्षिप्रं] अथवा कम्मसंजुतो कम्मसंजुत्तो कर्ममलविप्रमुक्त कर्ममलविप्रमुक्त सुखमतीन्द्रियमनन्तं सुखमनिन्द्रियमनन्तं [अतीन्द्रियं] [अनिन्द्रियं] कहलाता है [सर्वदर्शी] [सर्वलोकदर्शी] जिविदो जीविदो बलमिंदियमाऊ बलमिंदियमाउ जीवः] कहलाते हैं
SR No.022407
Book TitlePanchastikay Samaysar
Original Sutra AuthorKundkundacharya
AuthorPannalal Bakliwal
PublisherParamshrut Prabhavak Mandal
Publication Year1905
Total Pages184
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size18 MB
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