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________________ પૂજ્યપાદ આચાર્યદેવેશ શ્રીમદ્ વિજય પ્રધુમ્નસૂરીશ્વરજી મહારાજાના અણમોલ આશિષ " सर्वत्रशान्ति सुखसमृद्धि धर्मनो व्यद्वार हो ! ॥ नमो नमः श्री गुरुनेभिसूरये ॥ આ. વિજયપ્રદ્યુમ્નસૂરિ न विद्वत्प्रवा उनिधी अंक्टरमा यशोविनयन hell - biniy 2881मिठ्ठीमजी उपाय. वर्तमान संघका पू० साधु-साध्य महाराले पाताना सल्यानमा इयगुणपर्यायना रास मध्यन साहीरीत क्रीतको विस्तृत विवरण नमारा हाथ सजाय-नैमार्ट काम नयी থतरण घ्रधाधे भ तवामटएंगे की हिवस भयो पावत খনzilan 415 शाजामा पाठइजे पा विवरणवापारास लगावणामायावतो हाय पाकवानी प्रा तोतामे यु सुहस्सरण सुगम विवरण तैयार कटो नंदन शुभेच्छा भावे मातर्वाह पाठकीयों छीजे श्रसंघमा स्याह ‌वाह सफलगत नय-निक्षया नोटसम्मक बाध बघतेक्यु नितान्त नहीं के त्या मर्यhinमे निमिनको तथी मिम तरीकारी मनानाम्ना हो
SR No.022378
Book TitleDravya Gun Paryayno Ras Dravyanuyog Paramarsh Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYashovijay
PublisherShreyaskar Andheri Gujarati Jain Sangh
Publication Year2013
Total Pages432
LanguageGujarati, Sanskrit
ClassificationBook_Gujarati & Book_Devnagari
File Size74 MB
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