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________________ १०६ नवतत्त्वसंग्रहः पोरसीमे पढीये ते 'कालिक' - उत्तराध्ययन आदि, नंदी से जानना. उत्कालिक - दशवैकालिक प्रमुख जानना. इन १४ भेदेमे लौकिक लोकोत्तर भेद है सो समज लेना. एह चौदा भेद पुरा हूये. अथ श्रुतज्ञान लेनेकी विधि लिख्यते सुस्सूसइ १ शिष्य सिद्धांत लेनेहार होवे पडिपुच्छइ २ मूअ १ संदेह पडे विनय करी तो प्रथम एक नमन होकर चित्तपणे गुरुना | फेरकर पूछे मुहथी नीकल्या ए दूजा वचन सांभलने गुण. वांछे ए प्रथम गुण है. हुंकार २ तथा जे सुइ ३ संदेहना अर्थ कहै ते अछीतरे सावधान होकर सुणे. दूजी वार अर्थ सुणीने मस्तक गुरु प्रथम जद शिष्य गुरु कन्हे अर्थ तद विनय करी शरीर संको- हुंकारा देवे. नमाय कर ची मौन करे. ( ४० ) गिह ४ पीछे जे संदे नो अर्थ गुरे का अर्थ रूडी परे ग्रहण कर रखे. तीजी वार गाढा प्रगट बोले हे ५ ते अर्थ वळी पूर्वापर विरोध ( ४१ ) सात प्रकारे शास्त्र सुननेकी विधियंत्रं वाढक्कार ३ पडिपुच्छ ४ विमंसा ५ भगवन् ! ए वात इम ज है, अन्यथा नही. टाळीने हृदयमें विचारना करे. चौथी वार संदेह ऊठे तो प्रश्न पूछे. अपोहइ धारेइ करेइ ६ ७ ८ अर्थ विचारीने पछी निश्चय करे एह वात इम ही है. पांचमी वार अर्थ हिये विचारे. पीछे ते |पछे जे अनु अर्थ ष्ठान जिस हिये मे धारी विधिसे ह्या तिस विधि से करे ए न हुइ. आठमा गुण जानना. राखे, विस्मृत पसंगपराय परीयण ठिय ६ ७ छठी वार ते सातमी वारे अर्थके पार गुरुनी परे जाय. शिष्य अर्थ कहै. अथ शिष्य प्रते गुरु सिद्धांतना अर्थ किस रीतसे कहे ते वात कहीए है. गाथा""सुत्तत्थो खलु पढमो बीओ निज्जुत्तिमीसओ भणिओ । तइओ य निरवसेसो एस विही होइ अणुओगो ॥" ० पहिला गुरु सूचना अक्षरार्थ मात्र अछीतरे प्रकाशे, तिहां विशेष कांइ न कहइ. किस वास्ते ? पहिला विशेष कहतां शिष्यनी बुद्धि मूढा हो जावे, कुछ भी समजे नही. पीछे दूजी वार अर्थ जाण्या पीछे निर्युक्ति सहित सूत्र विशेष वखाणे. ते विशेष रूडी परे जाण्या पीछे वली तीजी वारे शिष्यने निरवशेष ते सूत्र माहिला विशेष अने सूत्रमे जो न कह्या गम्य शेष आदि सगला प्रकाशे. ए सिद्धांतना अनुयोग कहीए अर्थ कहेवानी विधि जाननी. इति श्रुतज्ञानस्वरूप संक्षेपथी संपूर्ण. १. सूत्रार्थः खलु प्रथमो द्वितीयो निर्युक्तिमिश्रको भणितः । तृतीयश्च निरवशेष एष विधिर्भवत्यनुयोगः ||
SR No.022331
Book TitleNavtattva Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijayanandsuri, Sanyamkirtivijay
PublisherSamyagyan Pracharak Samiti
Publication Year2013
Total Pages546
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari & Book_Gujarati
File Size14 MB
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