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________________ ( ३३ ) २ । धनदेव मेरा भाई, उसकी तू स्त्री, तातैं मेरी मानज [ भौजाई ] है. ३ | तु मेरी माता, ताका भरतार घनदेव मेरा पिता भया ताकी तू माता, ता मेरी दादी है । ४ । मेरा भरतार धनदेव, ताकी तू स्त्री, तातैं मेरी शौही ( सौतिन ) भी है । ५ । धनदेव तेरा पुत्र सो मेरा भी पुत्र ( सौतीला पुत्र ) arat तू स्त्री, तातैं तू मेरी पुत्रवधू भी है । ६। मैं धनदेवकी स्त्री, तू धनदेवकी माता, तातैं तू मेरी सास भी है. याप्रकार वेश्या ६ नाते सुनकर चिन्ता में विचारती रही, सो ही तहां धनदेव आया. ताकूं देखकर कमला बोली कि तुमारे साथ भी हमारे ६ नाते हैं सो सुणो. १ । प्रथम तो तू और मैं इसी वेश्याके उदरं युगल उक्या सो मेरा भाई है. २ | पीछे तेरा मेरा विवाह हो गया सो तू मेरा पति है. ३ | वसन्ततिलका मेरी माता ताका तू भरतार तातैं मेरा पिता भी है। ४ । वरुणा तेरा छोटा भाई सो मेरा काका भया ताका तू पिताततैं काकाका पिता होनेतें मेरा तु दादा भी भया ५ । मैं बसन्ततिलकाकी सौकी-भर तू मेरी सौकीका पुत्र तातें मेरा भी तू पुत्र है । । ६ । तू मेरा भरतार तावैं तेरी माता वेश्या मेरी सास भई, बहुरि सासके तुम भरतार, तातैं मेरे ससुर भी भये. ३
SR No.022298
Book TitleSwami Kartikeyanupreksha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJaychandra Pandit
PublisherBharatiya Jain Siddhant Prakashini Samstha
Publication Year
Total Pages306
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size18 MB
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